बिलासपुर। Makar Sankranti : मकर संक्रांति का त्यौहार इस बार 14 के साथ 15 जनवरी को भी दोपहर 1:00 बजे तक मनाया जाएगा। ज्योतिषी गणना के मुताबिक 15 तारीख को दोपहर 1:00 बजे तक सूर्य उत्तरायण में रहेंगे ।
Makar Sankranti : छत्तीसगढ़ में मकर संक्रांति का पर्व बहुत धूमधाम से मनाया जाता है । यह नई फसल तिल गुड़ और सामूहिक भोजन का पर्व है। लोग नदियों में स्नान कर अन्न, तिल- गुड़ का दान करते हैं । घरों में पांच प्रकार के साग खीर और पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं। किसान श्रम और सामूहिकता का सम्मान करते हैं । इस पर्व परतंगबाजी की भी परम्परा है। इस बार मकर संक्रांति 15 तारीख को भी दोपहर 1:00 बजे तक मनाए जाएगी। पंडित मुकुटधर शर्मा के अनुसार सूर्योदय से पहले पवित्र नदियों में स्नान करना शुभ माना जाता है । घर में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं ।
Makar Sankranti : बस्तर में कोदो और कुटकी की खिचड़ी बनती है। छत्तीसगढ़ के अन्य स्थानों पर तिल गुड़ से मिश्रित खिचड़ी बनाकर भगवान को अर्पित की जाती है। तिल और गुड ़ के लड्डू बनाए और बांटे जाते हैं। पतंगबाजी भी की जाती है। बिलासपुर में इस वर्ष राजा रघुराज सिंह स्टेडियम बंद होने के कारण शास्त्री मैदान में पतंगबाजी की जाएगी।
Makar Sankranti : पंडित शर्मा ने बताया यह सूर्य के उत्तरायण का पर्व है । छत्तीसगढ़ में कई स्थानों पर छेरछेरा की तरह आज इस दिन भी और छेरछेरा मांगने बाल्कों की टोली आती है। बस्तर में मकर संक्रांति से पहले दियारी त्यौहार मनाया जाता है। छत्तीसगढ़ में लोक संस्कृति में मकर संक्रांति का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह पर्व सामूहिकता और समानता को प्रोत्साहित करता है ।
अय्यप्पा मंदिर में विशेष आयोजन
बिलासपुर के प्रसिद्ध अय्यप्पा मंदिर में मकर संक्रांति के दिन विशेष आयोजन किया जाता है। तेलुगू समाज उसे दिन पोंगल मानता है और खास भोग अप्पम को लगाया जाता है। बिलासपुर के अय्यप्पा मंदिर की सजावट खास तरह से की जाती है और आसपास के सारे लोग इसमें शामिल होते हैं।
छठ घाट में सजावट
बिलासपुर के छठ घाट में विशेष सजावट की गई है यहां स्नान और सूर्य पूजा के लिए कल विशेष इंतजाम किया गया है ।
पतंग की दुकानें सजी
बिलासपुर में विभिन्न स्थानों पर पतंग की दुकान ें सज गई हैं इस बार चाँटी डीह में पतंगे बनाई गई हैं प्रतिबंध ित चाइनीस मांझा भी जगह-जगह पर दिखाई पड़ रहा है।
काली और सफेद तिल का बाजार तेज
त्योहार की डिमांड के कारण काली और सफेद तिल का बाजार बहुत तेज है तिल्ली लगभग ₹200 किलो बिक रही है।










