• विभिन्न संस्थाओं के प्रतिष्ठित पुरस्कारों से भी हुए थे सम्मानित
Flautist Vikram Yadav passed away : राजनांदगांव । छत्तीसगढ़ के पारम्परिक बाँस गीतों में बाँस वादन के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार विक्रम यादव नहीं रहे। श्री यादव छत्तीसगढ़ की विलुप्त होती बाँस वादन कला परम्परा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाने वाले एक प्रतिभा संपन्न और समर्पित लोक कलाकार थे । उनकी यह कला यात्रा लगभग छह दशकों तक चली। वे 85 साल के थे और राजनांदगांव जिले के ग्राम खैरा (रवेली)के निवासी थे । खैरा में ही पिछले हफ़्ते 29अक्टूबर को उनका निधन हुआ।
राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के समक्ष भी प्रस्तुति
साकेत साहित्य परिषद सुरगी के अध्यक्ष ओम प्रकाश साहू ‘ अंकुर ‘ ने आज बताया कि स्वर्गीय विक्रम यादव ने वर्ष 1971 में छत्तीसगढ़ के अंतरराष्ट्रीय रंगकर्मी हबीब तनवीर के ‘नया थिएटर’ से जुड़कर रायपुर, दिल्ली, भोपाल, कलकत्ता, दुर्गापुर, शोलापुर, उत्तर प्रदेश, पुणे, हरियाणा, कोल्हापुर, सतारा, मुंबई और अहमदाबाद सहित देश के विभिन्न स्थानों पर अपनी कला का प्रदर्शन किया। उन्होंने विदेशों में भी अपनी बाँस वादन कला की प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की इस विलुप्त होती लोककला का गौरव बढ़ाया । राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के समक्ष भी उन्होंने अपनी कला का प्रदर्शन किया था । उन्होंने वर्ष 2007 में रंगकर्मी अनूप रंजन पांडेय के ‘बस्तर बैंड’ से जुड़कर देश-विदेश में अपनी सांस्कृतिक सहभागिता को निरंतर आगे बढ़ाया।
विक्रम यादव को मिले कई सम्मान
स्वर्गीय विक्रम यादव की सुदीर्घ कला-साधना के लिए उन्हें वर्ष 2007 में युवा कुर्मी मित्र मंडल, भिलाई द्वारा ‘भुइयाँ सम्मान’ और मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा वर्ष 2018 में प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रीय तुलसी सम्मान’ से सम्मानित किया गया।छत्तीसगढ़ में वर्ष 2022 में गुरुघासीदास लोक कला महोत्सव, ककरेल तथा भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा)द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया गया। अपनी सुदीर्घ कला-यात्रा के दौरान स्वर्गीय श्री यादव ने लोक मड़ई, मंदराजी महोत्सव, चक्रधर समारोह, अंतरराष्ट्रीय महाउर कला महोत्सव, जयपुर लोकरंग महोत्सव एवं नया थिएटर, भोपाल जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर बाँस वादन कला से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई ।
अंतिम संस्कार में विशिष्टजन भी हुए शामिल
विक्रम यादव का अंतिम संस्कार 29अक्टूबर को उनके गृह ग्राम खैरा (रवेली) में किया गया । अंतिम संस्कार में राजनांदगांव के पूर्व सांसद और महापौर मधुसूदन यादव, जिला भाजपा अध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत, जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि पप्पू चंद्राकर, भाजपा मंडल अध्यक्ष मनोज साहू,खैरा के सरपंच भूपेंद्र यादव भर्रेगांव के पूर्व सरपंच दिलीप चंद्रकर, साकेत साहित्य परिषद सुरगी के अध्यक्ष ओमप्रकाश साहू ‘अंकुर’, पूर्व अध्यक्ष लखन लाल साहू लहर, उपाध्यक्ष पवन यादव पहुना, सर्किल यादव समाज के अध्यक्ष विशारद यादव, भगवान सिंह यादव, सरपंच,राम गुलाल यादव, कुशल यादव सहित बड़ी संख्या में विभिन्न सार्वजनिक संस्थाओं और कला जगत और साहित्य जगत से जुड़े हुए लोग और ग्रामीण जन उपस्थित थे। सभी लोगों ने दिवंगत बाँस वादक विक्रम यादव की कला साधना को याद करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी।
श्री अंकुर ने बताया कि छत्तीसगढ़ की
इस पारम्परिक लोककला के संरक्षण और विकास के लिए श्री विक्रम यादव के उल्लेखनीय योगदान को नमन करते हुए साकेत साहित्य परिषद, सुरगी ने उन्हें एक माह पहले ,विगत 4 अक्टूबर को ग्राम मोखला में आयोजित परिषद के वार्षिक समारोह में ‘साकेत कला साधना सम्मान–2026’ से
सम्मानित किया था।

