• हाई कोर्ट ने डीजीसीए के इंस्पेक्शन और लाइसेंस की औपचारिकता जल्दी सुनिश्चित करने कहा
•  कैंटीन, टॉयलेट और विश्रामगृह का काम शुरू न होने पर मुख्य सचिव से मांगा जवाब

बिलासपुर।  Bilaspur airport : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस राधा कृष्ण अग्रवाल की खंडपीठ में आज बिलासपुर में एयरपोर्ट और हवाई सुविधा विस्तार से जुड़ी जनहित याचिकाओं की सुनवाई हुई। राज्य सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने खंडपीठ को जानकारी दी की राज्य शासन द्वारा 50 करोड़ 64 लख रुपए 290 एकड़ जमीन के बदले में जमा कर दिए गए हैं और अब केवल जमीन वापस होने की औपचारिकता बाकी है।

Bilaspur airport : खंडपीठ ने इस पर संतोष जाहिर करते हुए कहा कि अब एयरपोर्ट को 4-सी श्रेणी में विकसित करने का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा। राज्य सरकार के मुख्य सचिव के द्वारा दाखिल शपथ पत्र से अन्य कई तथ्य भी खंडपीठ ने अपने आदेश में समाहित किए, जिनमें डीवीओआर मशीन और नाइट लैंडिंग लाइट की कमीशनिंग आदि होने के साथ-साथ डीजीसीए से नाइट लैंडिंग लाइसेंस संबंधी आवेदन भी प्रस्तुत हो जाने की बात महत्वपूर्ण है। खंडपीठ को यह बताया गया कि अब इसके बाद केवल डीजीसीए के इंस्पेक्शन और उसके बाद लाइसेंस जारी करने की औपचारिकता ही शेष है। शपथ पत्र में वायबिलिटी गैप फंडिंग के लिए उपलब्ध कराई गई राशि और यात्री सुविधाओं की स्थिति के बारे में भी उल्लेख किया गया था।

Bilaspur airport :  याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आशीष श्रीवास्तव ने डीजीसीए के इंस्पेक्शन का निवेदन किया इस पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा के द्वारा केंद्र सरकार के डिप्टी सॉलिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा से केंद्र सरकार के द्वारा यह कार्य जल्दी कराए जाने के निर्देश दिए। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने खंडपीठ का ध्यान 24 नवंबर को पारित आदेश के उसे अंश पर दिलाया, जिसमें मुख्य सचिव  द्वारा यह भरोसा दिया गया था कि टर्मिनल भवन के बाहर भी एक टॉयलेट, कैंटीन और यात्रियों के विश्रामगृह की व्यवस्था की जा रही है, जो दो महीने में बना दिया जाएगा। आज फोटोग्राफ प्रस्तुत करते हुए सुदीप श्रीवास्तव ने बताया कि लगभग 2 महीने बीतने को है परंतु अभी इस  भवन का कार्य भी शुरू नहीं हुआ है और यात्रीगण बाहर बरगद पेड़ के नीचे बैठकर खाना खाने के लिए मजबूर है। खंडपीठ को यह भी बताया गया कि मुख्य सचिव का नया शपथ पत्र इस बारे में खामोश है।

Bilaspur airport :  खंडपीठ ने इस बात को अपने आदेश में उल्लेखित करते हुए मुख्य सचिव से इस भवन के निर्माण संबंध में स्थिति से अवगत कराने एक नया शपथ पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए। गौर शतलब है कि बिलासपुर एयरपोर्ट पर बहुत दूर-दूर से आने वाले यात्री उन्हें लेने और छोड़ने जाने वाले व्यक्तियों के लिए बैठने टॉयलेट या चाय आदि की व्यवस्था भी नहीं है। इसी को देखते हुए टर्मिनल भवन के बाहर एक अतिरिक्त भवन निर्माण स्वीकृत किया गया है । इसके बारे में पिछले शपथ पत्र में मुख्य सचिव ने दो महीने के अंदर निर्माण पूरा करने का भरोसा दिया था, परंतु किन्हीं कारणों से कार्य चालू नहीं हो सका। खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को नियत की है।

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