बिलासपुर। CG High court: बर्खास्त आरक्षक को सेवा में बहाल करने के आदेश की अवमानना के लिए हाईकोर्ट ने एसपी महासमुंद को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने आरक्षक को बर्खास्त करने के आदेश को निरस्त करते हुए 90 दिनों के भीतर बहाल करने का आदेश दिया था।
CG High court: रायपुर निवासी आरक्षक नरेन्द्र यादव को सेवा से पृथक कर दिया गया था। हाईकोर्ट, बिलासपुर द्वारा 21 फरवरी 2025 को आरक्षक की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई के पश्चात् उसे सेवा से पृथक करने संबंधी आदेश को निरस्त करते हुए सेवा में बहाल करने का आदेश दिया गया था, परन्तु निर्धारित 90 दिवस से अधिक की समयावधि बीत जाने के पश्चात् भी एसपी. महासमुन्द आशुतोष सिंह द्वारा याचिकाकर्ता को बहाल नहीं किया गया।
CG High court: याचिकाकर्ता नरेन्द्र यादव द्वारा हाईकोर्ट अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं स्वाति कुमारी के माध्यम से हाईकोर्ट बिलासपुर के समक्ष अवमानना याचिका दायर की गई । अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय एवं स्वाति कुमारी द्वारा हाईकोर्ट के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर द्वारा किसी रिट याचिका या अन्य याचिकाओं में मेरिट पर आदेश पारित किये जाने के बावजूद भी छत्तीसगढ़ राज्य के आईएएस एवं आईपीएस अधिकारियों द्वारा हाईकोर्ट के आदेश का पालन ना कर पीड़ित पक्षकार को लगातार प्रताड़ित एवं परेशान किया जाता है। इस तरह आदेशों की लगातार अवमानना की जा रही है।
CG High court: याचिका पर सुनवाई में अधिवक्ताओं ने न्यायालय अवमान अधिनियम, 1971 की धारा 12 का हवाला दिया गया, जिसमें आदेशों की अवमानना करने पर दोषियों को 6 माह का कारावास या 2000 रू. का जुर्माना या दोनों दण्ड एक साथ दिये जाने का प्रावधान है। अधिवक्ताओं ने एसपी महासमुन्द आशुतोष सिंह को न्यायालय अवमान अधिनियम, 1971 की धारा 12 के तहत् दण्डित किये जाने की मांग की गई। हाईकोर्ट ने उक्त मामले में एसपी महासमुंद को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

