रायपुर। CGPSC SCAM: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने विशेष कोर्ट में 400 पन्नों की चार्जशीट पेश की है। इसमें तत्कालीन सीजीपीएससी अध्यक्ष टामन सोनवानी, परीक्षा नियंत्रक, सचिव और उद्योगपतियों समेत कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच में प्रश्नपत्र लीक, विशेष परीक्षा केंद्र और रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने जैसे कई खुलासे किए गए हैं।
CGPSC SCAM: सीबीआई की चार्जशीट के अनुसार, सीजीपीएससी भर्ती घोटाला पूरी तरह से सुनियोजित और संगठित साजिश का परिणाम था। प्रश्नपत्र लीक कराने के बाद चयनित अभ्यर्थियों को डिप्टी कलेक्टर और अन्य राजपत्रित पदों पर नियुक्त कराने के लिए बारनवापारा के आलीशान रिसॉर्ट को विशेष परीक्षा केंद्र बनाया गया। जांच में सामने आया है कि इस विशेष केंद्र पर अभ्यर्थियों के ठहरने, आवागमन और अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी कारोबारी उत्कर्ष चंद्राकर ने निभाई थी। चार्जशीट के अंतिम हिस्से में उत्कर्ष चंद्राकर को भी औपचारिक रूप से आरोपी बनाया गया है।
हालांकि वह अब तक फरार है।
CGPSC SCAM : सीबीआई की जांच में चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ है कि सीजीपीएससी 2020 के लिए तैयार किया गया प्रश्नपत्र परीक्षा नियंत्रक द्वारा संबंधित एजेंसी से साल भर पहले ही हासिल कर लिया गया था। एजेंसी के संचालक ने अपने बयान में सीबीआई को बताया कि परीक्षा नियंत्रक ने उनसे प्रश्नपत्र दिखाने के लिए बुलाया था। इस दौरान उन्होंने इसकी कॉपी कर ली और प्रश्नपत्र लौटा दिया। सबसे गंभीर बात यह है कि इस प्रश्नपत्र की कोई आधिकारिक एंट्री नहीं की गई और बाद में इसी प्रश्नपत्र का उपयोग सीजीपीएससी 2021 की मुख्य परीक्षा में कर लिया गया। सीबीआई के अनुसार, यह प्रश्नपत्र पहले ही लीक हो चुका था और इसकी जानकारी तत्कालीन अध्यक्ष टामन सोनवानी के रिश्तेदारों तक पहुंच चुकी थी
CGPSC SCAM: इस लीक का खुलासा टामन सोनवानी के भतीजे विनीत और उसकी पत्नी स्वेता के बीच हुई वाट्सएप चैट से भी हुआ, जिसे जांच का अहम आधार बनाया गया। चैट से यह स्पष्ट हुआ कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र और मॉडल उत्तर कुछ लोगों के पास मौजूद थे। सीबीआई की जांच में यह भी सामने आया कि तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव ने अपने बेटे सुमित ध्रुव को प्रश्नपत्र और मॉडल उत्तर पहले ही उपलब्ध करा दिया था। इसी का परिणाम रहा कि सुमित ध्रुव का चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हो गया। तलाशी के दौरान उनके घर से प्रश्नपत्र और उत्तरों की फोटोकॉपी भी बरामद की गई। इसी तरह तत्कालीन अध्यक्ष टामन सोनवानी पर अपनी बहू मीशा कोसले और दीपा आदिल को चयन में लाभ पहुंचाने का आरोप है। चार्जशीट में नेहा और निखिल खलखो के चयन को भी संदिग्ध बताया गया है।
ये हैं नामजद आरोपी
CGPSC SCAM: सीबीआइ ने जिन आरोपितों के खिलाफ फाइनल चार्जशीट दाखिल की है, उनमें जेल में बंद तत्कालीन सीजीपीएससी अध्यक्ष टामन सोनवानी, उद्योगपति श्रवण कुमार गोयल, तत्कालीन सचिव जीवन किशोर ध्रुव, उनके बेटे सुमित ध्रुव, परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक, टामन सोनवानी का भतीजा नितेश सोनवानी, शशांक गोयल, उसकी पत्नी भूमिका कटियार, साहिल सोनवानी, एक्जाम कंट्रोलर ललित गणवीर, मीशा कोसले, दीपा अजगले आदिल और उत्कर्ष चंद्राकर शामिल हैं। सोनवानी के 5 रिश्तेदारों ने हासिल की नौकरी
आरोप है कि इसमें तत्कालीन चेयरमैन सोनवानी के पांच रिश्तेदार बेटे नीतेश और बहू निशा कोसले का डिप्टी कलेक्टर, भाई की बहू दीपा अगजले का जिला आबकारी अधिकारी, बहन की बेटी सुनीता जोशी का श्रम अधिकारी एवं बड़े भाई के बेटे साहिल सोनवानी का चयन डीएसपी के पद पर हुआ था।
CGPSC SCAM: इस मामले का उल्लेखनीय पहलु यह है कि सीजीपीएससी परीक्षा 2021 के परिणाम की घोषणा के बाद जब घोटाले के आरोप लगने लगे, तभी छत्तीसगढ़ के पूर्व गृह मंत्री ननकी राम कंवर ने हाई कोर्ट में याचिका दायर करके घोटाले की जांच की मांग की। हाई कोर्ट ने भी इस मामले को गंभीर माना और इसकी जांच के आदेश दिए। हालांकि जांच के अभी भी आधे अधूरे होने के आरोप लग रहे हैं। माना जा रहा है कि जो प्रश्नपत्र लीक हुआ है, उसका लाभ अन्य अभ्यर्थियों को भी पहुंचाया गया है। सघन जांच की जाए तो और भी खुलासे हो सकते हैं।










