कांकेर। Conversion controversy: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में धर्मांतरण को लेकर तनाव के बीच जिले के दो अलग-अलग गांवों में कुल 22 ईसाई धर्मांतरिताें ने विधि-विधान से अपने मूल धर्म में वापसी की है । इधर धमतरी जिले में धर्मान्तरित महिला के शव को दफनाने के विरोध के बाद तनाव की स्थिति निर्मित हो गई। हालांकि संबंधित परिवार की मूल धर्म में वापसी की सहमति के बाद यह मामला सुलझा लिया गया है।
Conversion controversy: कांकेर जिले के दो अलग-अलग गांवों में कल गुरूवार काे कुल 22 ईसाई धर्मांतरिताें ने विधि-विधान से अपने मूल धर्म में वापसी की है। यह वापसी आमाबेड़ा के बड़े तेवड़ा में हुई हालिया घटना के विरोध में सर्व समाज द्वारा ‘छत्तीसगढ़ बंद’ के बाद हुई है। घर वापसी का पहला मामला आमाबेड़ा क्षेत्र के ग्राम चिखली में 19 धर्मांतरित सदस्यों ने सामूहिक रूप से अपने मूल धर्म में वापसी की है, ये सभी एक ही परिवार और समुदाय से संबंधित थे। गांव के शीतला मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया, जिसमें गांव के गायता, पटेल और समाज प्रमुख उपस्थित रहे। समाज प्रमुखों ने गंगाजल और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इन सदस्यों का शुद्धिकरण कर उन्हें पुनः समाज की मुख्यधारा में शामिल किया। ग्रामीणों ने इस कदम का स्वागत किया।
Conversion controversy: नरहरपुर थाना क्षेत्र के ग्राम हाराडुला से सामने आया है। यहां एक परिवार के 3 लाेगाें ने पांच वर्ष पूर्व ईसाई धर्म अपनाया था, जिसने अब स्वेच्छा से मूल धर्म में वापसी की है। परिवार के मुखिया और उनके दो पुत्रों ने अपने पूर्वजों के धर्म को सर्वोपरि मानते हुए वापसी की। गांव के दुर्गा मंदिर में ग्रामीणों की मौजूदगी में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ । ग्रामीणों ने सम्मान के प्रतीक स्वरूप वापसी करने वालों के पैर धुलाए और तिलक लगाकर उनका अभिनंदन किया।
Conversion controversy: यह घर वापसी ऐसे समय में हुई है जब बड़े तेवड़ा की घटना को लेकर स्थानीय समाज में आक्रोश व्याप्त है। गांव के गायता, पटेल और समाज प्रमुखों ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि लोग अब अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं और अपनी संस्कृति व परंपराओं को बचाने के प्रति जागरूक हो रहे हैं। उनका मानना है कि समाज से कटे हुए लोगों की वापसी से न केवल परिवार बल्कि पूरे गांव का गौरव बढ़ता है। समाज प्रमुखों ने यह भी कहा कि वे ऐसे लोगों का खुले दिल से स्वागत करते हैं।
Conversion controversy: उधर धमतरी में एक साहू महिला के शव को दफनाने को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया, क्योंकि ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि महिला ने धर्मांतरण कर लिया था। बोराई गांव के स्थानीय निवासियों ने दावा किया कि मृतक महिला ने कथित तौर पर धर्म बदल लिया था और अब वह हिंदू नहीं थी, इसलिए उसका अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार गांव में नहीं किया जा सकता।दरअसल हिंदू परंपरा में आमतौर पर दाह संस्कार (जलाना) किया जाता है, जबकि अन्य धर्मों में दफन (मिट्टी देना) किया जाता है। परिजन शव को दफनाना चाहते थे, जिसका ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया।
Conversion controversy: इस मामले ने इतना तूल पकड़ा कि स्थिति बिगड़ने पर परिवार शव को नगरी ले गया, मगर वहां भी स्थानीय लोगों ने यह कहते हुए विरोध किया कि वहाँ दफन के लिए कोई निर्धारित भूमि नहीं है। इस दौरान प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया और दोनों पक्षों के बीच सुलह के प्रयास किए। काफी तनाव और चर्चा के बाद, परिवार ने घर वापसी का फैसला किया और लिखित में दिया कि वे हिंदू धर्म अपना रहे हैं। इसके बाद, यह निर्णय लिया गया कि महिला का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार किया जाएगा। गांव में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था।










