रायपुर ।  Writer Vinod Kumar Shukla:  साहित्य अकादमी पुरस्कार और ज्ञानपीठ पुरस्कार सहित अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल को आज छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में अत्यंत शोकाकुल माहौल में अंतिम बिदाई दी गई। स्थानीय मारवाड़ी श्मशान घाट में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां  वे पंच तत्व में विलीन हो गए ।  इस मौके पर उनके शोक संतप्त परिवार जनों सहित अनेक स्थानीय साहित्यकार ,पत्रकार और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित थे । सभी लोगों ने स्वर्गीय श्री शुक्ल को श्रद्धांजलि अर्पित की।ज्ञातव्य है कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के निवासी श्री शुक्ल का कल  23दिसम्बर की शाम यहां एम्स में निधन हो गया था। उनका जन्म एक जनवरी 1937को राजनांदगांव में हुआ था । वे विगत कई दशकों से रायपुर में निवास कर रहे थे।

पीएम मोदी , सीएम साय और कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे ने शोक प्रकट किया
                                  
वरिष्ठ साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल के निधन पर  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गहरा शोक प्रकट किया है । ज्ञानपीठ सहित अनेक महत्वपूर्ण पुरस्कारों से सम्मानित श्री शुक्ल का कल 23दिसम्बर की शाम रायपुर के एम्स में निधन हो गया था.।

शुक्ल जी हिन्दी साहित्य  जगत में हमेशा स्मरणीय रहेंगे- मोदी
                  
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपने एक्स -हैण्डल (ट्विटर)पर जारी शोक -संदेश में कहा है –
“ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात लेखक विनोद कुमार शुक्ल जी के निधन से अत्यंत दुःख हुआ है। हिन्दी साहित्य जगत में अपने अमूल्य योगदान के लिए वे हमेशा स्मरणीय रहेंगे। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।

विनोद कुमार शुक्ल मानवीय करुणा की भाषा रचने वाले साहित्यकार थे -मल्लिकार्जुन खड़गे
                       
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने एक्स -हैण्डल (ट्विटर )पर जारी शोक -संदेश में कहा कि विनोद कुमार शुक्ल मानवीय करुणा  भाषा रचने वाले कवि और लेखक थे । ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित कवि, कहानीकार और उपन्यासकार  शुक्ल जी का निधन हिन्दी साहित्य जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। श्री खड़गे ने कहा कि ‘नौकर की कमीज़’ ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ और ‘लगभग जयहिंद’ जैसी स्वर्गीय श्री शुक्ल की रचनाएँ उन्हें हमारे बीच अमर रखेंगी।श्री खड़गे ने उनके शोकाकुल परिवारजनों और प्रशंसकों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं.

उनकी रचनाएँ हिन्दी साहित्य की अनमोल धरोहर – विष्णु देव साय


                 
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भी श्री विनोद कुमार शुक्ल के देहावसान पर शोक प्रकट किया है  । श्री साय ने कहा कि  प्रदेश के जाने -माने कवि और लेखक श्री शुक्ल का निधन हिन्दी साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।  मुख्यमंत्री ने अपने शोक -संदेश में कहा कि श्री  शुक्ल की रचनाएँ हिन्दी साहित्य की अनमोल धरोहर होने के साथ -साथ मानवीय संवेदनाओं  और जीवन-दर्शन की सजीव अभिव्यक्ति है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने ईश्वर से प्रार्थना की कि वे इस दुःख की घड़ी में स्वर्गीय श्री शुक्ल के परिजनों सहित सभी को संबल प्रदान करें तथा पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय श्री शुक्ल ने ‘नौकर की कमीज’  और ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’  जैसी अपनी अनेक कालजयी कृतियों  में आम जनता की भावनाओं को असाधारण रूप से हृदय स्पर्शी अभिव्यक्ति दी।

श्री साय ने कहा कि मानवीय मूल्यों पर आधारित श्री विनोद कुमार शुक्ल की संवेदनशील दृष्टि और मौलिक भाषा-शैली पाठकों को हमेशा प्रेरणा देती रहेंगी और हिन्दी साहित्य में उनका योगदान अमिट रहेगा । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज सवेरे राजधानी रायपुर में सुप्रसिद्ध साहित्यकार स्वर्गीय श्री  विनोद कुमार शुक्ल के निवास पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। ज्ञानपीठ पुरस्कार सहित अन्य कई महत्वपूर्ण पुरस्कारों से सम्मानित श्री शुक्ल का कल 23दिसम्बर की शाम रायपुर के एम्स में निधन हो गया था। उनका अंतिम संस्कार आज यहां राजकीय सम्मान के साथ किया गया।

भारतीय ज्ञानपीठ ने भी श्रद्धांजलि दी
                       
भारतीय ज्ञानपीठ के महाप्रबंधक श्री  आर. एन. तिवारी ने कहा कि श्री विनोद कुमार शुक्ल के निधन की खबर सुनकर मैं स्तब्ध हूँ । पिछले महीने ही हमने रायपुर आकर, उनके घर जाकर उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया था। भारतीय ज्ञानपीठ परिवार की ओर उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि।
           

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