बिलासपुर । Basant Panchami : हिंदू पंचांग के माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर 23 जनवरी को मां सरस्वती की आराधना का पर्व बसंत पंचमी श्रद्धा उल्लास से मनाया जाएगा। पूरे वर्ष में देवउठनी एकादशी और अक्षय तृतीया के अलावा तीसरा अबूझ मुहूर्त बसंत पंचमी को माना जाता है। इन मुहूर्तों में पंचांग देखने की आवश्यता नहीं होती। इस दिन सभी तरह के शुभ संस्कार संपन्न किए जा सकते हैं। इस दिन कई शुभ योगों का निर्माण हो रहा है।

Basant Panchami :   इस दिन गृह प्रवेश, वाहन खरीदी, आभूषण खरीदी एवं नया व्यवसाय करना शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन जो भी काय किया जाए वह स्थायी रूप से फल प्रदान करता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचमी तिथि 23 जनवरी को सुबह 2.बजकर 28 मिनट पर प्रारंभ होगी। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7 से दोपहर 12.30 बजे तक है। इस दिन रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग का संयोग बन रहा है।

Basant Panchami :  साथ ही मालव्य और शश राजयोग का निर्माण हो रहा है। शुक्र और शनि के उच्च या स्वराशि में होने से यह राजयोग बन रहा है, जो करियर, धन और सुख-सुविधाओं में वृद्धि करता है। इसके अलावा बुधादित्य योग भी बन रहा है, जो विद्यार्थियों और बौद्धिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है।

Basant Panchami :  ऐसी मान्यता है कि बसंत पंचमी पर मां सरस्वती का अवतरण हुआ था। मां सरस्वती को ज्ञान की देवी कहा जाता है। पंचमी तिथि पर बच्चों को पहला अक्षर ज्ञान सिखाने से वह कुशाग्र बुद्धि का होता है। गायत्री परिवार में अक्षर ज्ञान और बंगाली समाज में हाथे खड़ी यानी चॉक से अक्षर लिखना सिखाने की परंपरा निभाई जाती है। बच्चों को पीले वस्त्र पहनाकर मां सरस्वती की आराधना करके अक्षर ज्ञान देने के साथ ही जरूरतमंदों को लेखन सामग्री जैसे, पेन, पेंसिल, कॉपी, पुस्तक आदि का दान देना चाहिए।

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