• अतुल कांत खरे अयोध्या से लौटकर
Ayodhya dham: बिलासपुर । (fourthline) । चंदा चोरी उजागर होने के बाद से अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार घट रही है। राम भक्तों की भावनाएं आहत होने से बस होटल गेस्ट हाउस और चढ़ावा सामग्रियों का बाजार घटकर आधा रह गया है। पिछले चार माह में 65% से ज्यादा श्रद्धालु घट गए हैं। इस वर्ष जनवरी से जुलाई तक लगभग 8 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे हैं जबकि पिछले साल यह संख्या 22 करोड़ से ज्यादा थी।
Ayodhya dham: सरयू नदी में होने वाली वोटिंग में भी 50 फ़ीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है। सरयू की आरती देखने भी बहुत कम लोग पहुंच रहे हैं । स्थानीय लोगों का कहना है चंदा चोरी के साथ-साथ यहां पड़ रही भीषण गर्मी भी एक कारण है। यहां इस साल बेहद कम वर्षा हुई है और उमस बेचैनी पैदा कर रही है। एसी गेस्ट हाउस का किराया 1000 से ₹2000 तक पहुंच चुकी है। अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को हुई थी। उस समय 10 करोड़ से ज्यादा पर्यटक श्रद्धालु पहुंचे थे। चंदा चोरी उजागर होने के बाद से श्रद्धालुओं घटती गई है।

Ayodhya dham: अयोध्या में अव्यांश गेस्ट हाउस के संचालक अवयाश कुमार बताते हैं कि इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है और इसका प्रभाव भी पड़ रहा है । एसी गेस्ट हाउस का एक रूम का भाड़ा 1500 रुपए तक पहुंच चुका है। भीषण गर्मी में श्रद्धालुओं के लिए कतार में लगना दुष्कर हो गया है। हनुमानगढ़ी में भी बहुत लंबी कतार लगती है और पर्याप्त पंखों की व्यवस्था न होने के कारण श्रद्धालु पसीने से नहाए रहते हैं। यही हाल अयोध्या धाम में है। यहां श्रद्धालुओं के लिए लगाए गए पंखे छोटे आकार के और दूर-दूर हैं।
श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत
दीपिका गेस्ट हाउस की संचालक श्रीमती दीपिका बताती हैं की राम मंदिर में चढ़ावा चोरी सामने आने से श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंची है। इसके चलते यहां का व्यापार भी प्रभावित हुआ है। होटल व्यवसाय, स्थानीय दुकानदारों का कारोबार ठंडा पड़ गया है। हालांकि सावन मास शुरू होने से स्थिति में सुधार आया है।
दान पात्रों की संख्या बढ़ाई गई
मंदिर प्रशासनिक कमेटी से जुड़े रामनारायण महंत बताते हैं कि दान पात्रों की संख्या बढ़ा दी गई है ।हालांकि पहले की अपेक्षा दान कम आ रहा है ।इसका कारण श्रद्धालुओं का मन प्रभावित होना हो सकता है। दान पात्रों की संख्या बढ़ा दी गई है और चेक देने वाले श्रद्धालुओं को रसीद भी दी जा रही है। उन्होंने चंदा चोरी संबंधित अन्य सवालों पर बात करने से मना कर दिया।. उज्जैन से आए लक्ष्मी नारायण शर्मा ने बताया कि चंदा चोरी ने जनभावनाओं को आहत किया है और इसके दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं ।
छत्तीसगढ़ के लिए बसें घटी
शुभम बस सर्विस के संचालक राजा कुमार ने बताया कि पहले अयोध्या से छत्तीसगढ़ के लिए लगभग 11 बसें चलती थी जो घटकर सिर्फ दो रह गई हैं । चंदा चोरी सामने आने के बाद से श्रद्धालुओं की संख्या लगातार घट गई है।. छत्तीसगढ़ से आने वाले ज्यादातर श्रद्धालु ट्रेन से लौटते हैं या फिर बस के जरिए प्रयागराज जाकर प्रयागराज से ट्रेन लेते हैं। इन दिनों बस का व्यवसाय घटकर आधा हो गया है।
सीता रसोई की खिचड़ी
मंदिर परिसर में चलने वाली सीता रसोई मैं भी खाना खाने वाले लोग घटे हैं। इसमें ज्यादातर साधु स्थानीय होते हैं। दूर-दूर शहरों से आए हुए लोग यहां सिर्फ खिचड़ी लेना पसंद कर रहे हैं। भोजन कम हो लोग ले रहे हैं। मंदिर परिसर के बाहर चल रहे होटल का व्यवसाय भी 50 फीसदी से ज्यादा प्रभावित हुआ है। भोजनालय की संचालिका शिखा मिश्रा बताती हैं कि पिछले साल इस सीजन में उन्हें खाद्यान्न कम पड़ जाता था, इतने लोग आते थे। इस बार गिनती के लोग भोजन करने आ रहे हैं। हालांकि 1 साल में यहां होटल की संख्या काफी बड़ी है और हर तरह का भोजन यहां उपलब्ध कराया जा रहा है।

सरयू की बोटिंग में भी गिरावट
सरयू घाट और रामघाट लंबे समय से श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहे हैं , परन्तु यहां आकर वोटिंग करने वालों की संख्या भी घटी है। चंदा चोरी सामने आने के बाद से यहां बोटिंग 50 फीसदी तक घट चुकी है।. वोट संचालक रवि कुमार बताते हैं की प्रति व्यक्ति ₹100 लिया जाता है और पूरी सरयू घाट की सैर कराई जाती है। सरयू की आरती देखने के लिए लोगों में अच्छा रुझान होता है। इस समय बोट की कीमत 200 से 300 रुपए तक हो जाती है। पिछले साल के मुकाबले 50 फ़ीसदी श्रद्धालु घट चुके हैं और बोट का व्यवसाय काफी प्रभावित हुआ है।

दशरथ महल, कनक महल और लव-कुश परिसर में पानी की समस्या
दशरथ महल, कनक महल और लव कुश परिसर में पेयजल की समस्या स्पष्ट नजर आई। दशरथ महल में सिर्फ एक पानी की टंकी है, जिसे पता नहीं कब से साफ भी नहीं किया गया है। जंग लगी टोंटी से वहां पानी पीने श्रद्धालु मजबूर हैं। यही हाल लवकुश परिसर में है। श्रद्धालुओं को पानी साथ लाना पड़ रहा है।. यहां लंबे समय से बारिश नहीं हुई है और उमस भरी गर्मी के कारण श्रद्धालुओं को बार-बार चेहरा धोना पड़ता है। साफ पानी न मिलने से श्रद्धालुओ में आक्रोश है। यहां हर एक चीज व्यवसाय में बदल चुकी है इसलिए पानी की बोतल खरीदना पड़ती है जिससे श्रद्धालुओं पर अतिरिक्त भार पड़ता है। इन बोतलों की कीमत ₹10 से बढ़कर ₹20 ₹25 तक है।









