Nana Patekar no more : पणजी । हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में गोवा में निधन हो गया। सीने में तेज दर्द की शिकायत के बाद मणिपाल अस्पताल ले जाया गया था, जहां जांच के बाद डाक्टरों ने की टीम ने उन्हें मृत घोषित किया। नाना के निधन की खबर से पूरे सिनेमा जगत में शोक की लहर।
Nana Patekar no more : भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया । उन्होंने गोवा में आखिरी सांस ली। अचानक सामने आई इस दुखद खबर से पूरी फिल्म इंडस्ट्री और उनके लाखों प्रशंसकों के बीच शोक का माहौल है । नाना पाटेकर के बेटे मल्हार पाटेकर ने अपने पिता के निधन की खबर देते हुए बताया कि परिवार इस वक्त गहरे सदमे में है।
सीने में दर्द की शिकायत, अस्पताल ले जाते मौत
मिली जानकारी के मुताबिक 8 अक्टूबर की तड़के नाना पाटेकर को गोवा स्थित उनके फ्लैट पर अचानक सीने में तेज दर्द की शिकायत हुई। आनन-फानन में गोवा के मणिपाल अस्पताल की मेडिकल टीम को उनके आवास पर भेजा गया। डॉक्टरों की टीम जब मौके पर पहुंची तब अभिनेता अचेत अवस्था में मिले। मेडिकल स्टाफ ने उन्हें फौरन कार्डियक मसाज और जरूरी फर्स्ट एड दिया और अस्पताल ले जाया गया। हालांकि तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और अस्पताल की टीम ने सुबह 5.20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया। बेटे मल्हार ने बताया कि वह गोवा पहुंचकर तमाम औपचारिकताएं पूरी करेंगे।
‘गमन’ से आगाज और ‘क्रांतिवीर’ से चमके
नाना पाटेकर का शुमार उन अभिनेताओं में होता है जिन्होंने अपनी आवाज, बेबाक संवाद अदायगी और संजीदा अभिनय के दम पर फिल्मी दुनिया में अपना एक अलग मकाम बनाया। उन्होंने 1978 में मुजफ्फर अली की फिल्म ‘गमन’ से अपने फिल्मी सफर का आगाज किया था। इसके बाद ‘अंकुश’, ‘प्रतिघात’, ‘सिंहासन’ और ‘सलाम बॉम्बे!’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अपने फन का ऐसा लोहा मनवाया कि हर कोई उनका कायल हो गया। साल 1992 में आई फिल्म ‘अंगार’ के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। इसके बाद 1994 में रिलीज हुई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘क्रांतिवीर’ में उनके द्वारा बोले गए डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर ताजा हैं। इस फिल्म के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड और फिल्मफेयर दोनों से नवाजा गया था।
हर किरदार में ढाला खुद को, किसानों के लिए जंग
विलेन के खौफनाक रोल से लेकर संजीदा ड्रामा और गुदगुदाने वाली कॉमेडी तक, नाना पाटेकर ने हर खांचे में खुद को बखूबी साबित किया। ‘परिंदा’, ‘तिरंगा’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘अपहरण’, ‘राजनीति’ और कॉमेडी फ्रैंचाइजी ‘वेलकम’ में उनका ‘उदय भाई’ का किरदार हमेशा यादगार रहेगा। कैमरे के सामने जलवे बिखेरने के अलावा उन्होंने 1991 में फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ का निर्देशन और लेखन कर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय भी दिया था। हालिया दिनों में वह पूरी तरह सेहतमंद नजर आ रहे थे और ओटीटी के साथ-साथ कई नए प्रोजेक्ट्स पर सक्रिय थे। पर्दे पर एक कद्दावर कलाकार होने के साथ-साथ निजी जिंदगी में वह महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित किसानों की मदद और सामाजिक मुद्दों पर हमेशा बेबाकी से खड़े रहने के लिए भी जाने जाते रहेंगे।

