नई दिल्ली । Women Reservation: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण कानून को लेकर महत्वपूर्ण पहल करते हुए सभी राजनीतिक दलों से एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा के फ्लोर लीडर्स को पत्र लिखकर कहा कि अब समय आ गया है कि इस कानून को सच्ची भावना के साथ लागू किया जाए। उन्होंने जोर दिया कि व्यापक चर्चा के बाद यह निष्कर्ष निकला है कि देश में महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए यह कदम जरूरी है।
Women Reservation: प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति तभी संभव है, जब महिलाओं को नेतृत्व और निर्णय लेने में समान अवसर मिले। उन्होंने इसे “विकसित भारत” के लक्ष्य से जोड़ते हुए स्पष्ट किया कि 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महिला आरक्षण लागू करना एक अहम कदम होगा। इससे राजनीति में महिलाओं की भागीदारी और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे।
विशेष संसद सत्र में होगी चर्चा
सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है, जिसमें महिला आरक्षण कानून में जरूरी संशोधनों पर चर्चा की जाएगी। वर्तमान प्रावधानों के अनुसार लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का लक्ष्य है। प्रस्तावित बदलावों के बाद लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 816 हो सकती है, जिनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
क्यों जरूरी है संशोधन?
मौजूदा प्रावधानों के अनुसार यह आरक्षण 2027 की जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया के बाद ही लागू हो पाता, जिससे इसकी शुरुआत 2034 तक टल सकती थी। लेकिन सरकार अब इसे 2029 चुनाव से लागू करने के लिए “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” में संशोधन करने की तैयारी में है। भारतीय जनता पार्टी ने विशेष सत्र से पहले अपने सभी सांसदों को तीन-लाइन व्हिप जारी किया है। इसमें 16 से 18 अप्रैल तक संसद में अनिवार्य उपस्थिति के निर्देश दिए गए हैं, ताकि इस अहम विधेयक पर बिना किसी बाधा के चर्चा और निर्णय हो सके।










