• हाईकोर्ट ने जांच पर भी उठाए सवाल, सरकार को जांच एजेंसियों के काम की निगरानी के लिए सिस्टम बनाने की नसीहत
बिलासपुर। CG high court: चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डीबी ने ताड़मेटला में 76 जवानों की शहादत के आरोपी कथित नक्सलियों को दोषमुक्त किए जाने के खिलाफ शासन की अपील हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि सीआरपीएफ जवानों पर बड़े पैमाने पर हमले के आरोपियों को बरी करने का निचली अदालत का फ़ैसला सही है, क्योंकि सीधे सबूत नहीं थे। जांच में प्रोसेस में कमियां थीं, और जुर्म की गंभीरता के बावजूद जांच एजेंसी गुनाह साबित करने में नाकाम रही थी।
CG high court: उल्लेखनीय है कि सत्यवान सिह, डिप्टी कमांडर, 62वीं बटालियन सीआरपीएफ 04.04.2010 से 07.04.2010 तक एरिया डॉमिनेशन पेट्रोलिग पर कंपनी और पुलिस फोर्स के 82 जवानों के साथ चितलनार के पहाड़ी जंगल की ओर जा रहे थे, तभी ताड़मेटला गांव के जंगल में नक्सलियों ने हमला कर दिया, जिसमें 76 जवान शहीद हो गए थे। नक्सली जवानों के हथियार भी लूट लिए थे।। जांच पूरी होने के बाद, आरोपियों के खिलाफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास, कोंटा (छत्तीसगढ़) की कोर्ट में चार्जशीट पेश की गई, जहां से केस सेशन कोर्ट, साउथ बस्तर, डिस्टि्रक्ट दंतेवाड़ा को भेज दिया गया, जहां से केस को एडिशनल सेशन जज, साउथ बस्तर, डिस्टि्रक्ट दंतेवाड़ा की कोर्ट ने आरोपियों को सभी आरोप से बरी कर दिया था।
CG high court: हाईकोर्ट ने शासन की अपील खारिज करते हुए यह भी कहा कि जांच एजेंसियों की के काम निगरानी के लिए इंटरनल रिव्यू सिस्टम बनाए जाने चाहिए। राज्य को जांच की काबिलियत बढ़ाने के लिए कर्मचारियों के लिए ट्रेनिग प्रोग्राम भी लागू करने चाहिए और इन निर्देशों का पालन करने के लिए उठाए गए कदमों पर समय-समय पर रिपोर्ट देनी चाहिए। ऐसे उपाय प्रोसेस में होने वाली गलतियों को रोकने, पीड़ितों को न्याय दिलाने और क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए ज़रूरी हैं। रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया है कि इस ऑर्डर की एक सर्टिफाइड कॉपी छत्तीसगढ़ सरकार के चीफ सेक्रेटरी, रायपुर और छत्तीसगढ़, रायपुर के पुलिस डायरेक्टर जनरल को भेजी जाए, जो इसे जानकारी और ज़रूरी पालन के लिए अपने अधीन आने वाले अधिकारियों को भेज सकते हैं।










