Gen-Z Movement Discussion : रायपुर। युवाओं के चर्चित Gen-Z आंदोलन पर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में प्रबुद्ध नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की परिचर्चा आयोजित की गई। इसका आयोजन छत्तीसगढ़ी समाज सहित राजधानी की दो समाज सेवी संस्थाओं डॉक्टर्स ऑन स्ट्रीट (दोस्त ) और प्रोग्रेसिव यूटिलाइजेशन ऑफ रिसर्च एंड इकॉनॉमिक्स (प्योर )ने मिलकर किया ।
Gen-Z Movement Discussion : टिकरापारा के सिद्धार्थ चौक स्थित गुडविल्स हॉस्पिटल के सेमिनार हॉल में हुई इस परिचर्चा में जेन-जी आंदोलन की पृष्ठभूमि, नई पीढ़ी की राजनीतिक जागरूकता, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में युवाओं की भागीदारी, अहिंसक प्रतिरोध तथा भारतीय समाज में लगातार घटित होते रहे सामाजिक परिवर्तनों पर गंभीर और सार्थक चर्चा हुई ।
Gen-Z Movement Discussion : परिचर्चा के मुख्य अतिथि एवं वक्ता योजना, कृषि और ग्रामीण विकास जैसे विषयों के विशेषज्ञ और सलाहकार प्रदीप शर्मा ने भारतीय इतिहास से लेकर वर्तमान समय तक आंदोलनों की भाषा में हुए बदलाव को रेखांकित किया। उन्होंने जेन-जी के जीवन-मूल्यों, अहिंसक प्रतिरोध, सामाजिक सोच और लोकतांत्रिक चेतना में हो रहे विकास पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि जेन-जी को केवल एक आयु-वर्ग के रूप में देखने के बजाय उसके भीतर विकसित हो रही सामाजिक और राजनीतिक चेतना को समझना बहुत जरूरी है।
Gen-Z Movement Discussion : छत्तीसगढ़ी समाज के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सत्यजीत साहू की अध्यक्षता में आयोजित इस परिचर्चा में वरिष्ठ पत्रकार, छत्तीसगढ़ी गीतकार और सामाजिक कार्यकर्त्ता देवेश तिवारी और छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन के प्रमुख नेता रहे डॉ.उदयभान सिंह चौहान विशेष अतिथि और विशेष वक्ता के रूप में शामिल हुए । प्रतिभागियों ने जेन-जी आंदोलन को केवल एक तात्कालिक घटना के रूप में देखने के बजाय उसे बदलती हुई युवा चेतना, लोकतांत्रिक आकांक्षाओं और व्यापक सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया के संदर्भ में समझने की आवश्यकता पर जोर दिया।
Gen-Z Movement Discussion : परिचर्चा की शुरुआत ‘दोस्त ‘संस्था के निवर्तमान अध्यक्ष सुनील शर्मा ने की। उन्होंने कार्यक्रम की भूमिका प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारतवर्ष के इतिहास में सामाजिक जागरूकता और परिवर्तन की प्रक्रिया निरंतर चलती रही है। कृषि क्रांति से लेकर औद्योगिक क्रांति, स्वतंत्रता संग्राम, लोकतंत्र की स्थापना और उसकी विकास यात्रा से होते हुए आज के जेन-जी आंदोलन को भी इसी व्यापक सामाजिक चेतना की एक नई कड़ी के रूप में देखा जाना चाहिए। परिचर्चा में जेन-जी समुदाय की ओर से संस्कृति ठाकुर, होनेशा ठाकुर और अजहान अली ने अपने जोशीले वक्तव्यों के माध्यम से नई पीढ़ी की सोच और आकांक्षाओं को सामने रखा ।
Gen-Z Movement Discussion : कार्यक्रम के विशेष अतिथि वक्ता वरिष्ठ पत्रकार देवेश तिवारी ने जेन-जी आंदोलन की नवीनता तथा इस पीढ़ी में दिखाई दे रही राजनीतिक जागरूकता पर विस्तार से अपनी बात रखी । श्री तिवारी ने कहा कि नई पीढ़ी में जो सामाजिक और राजनीतिक जागरूकता आ रही है, उसने जेन-जी की अभिव्यक्ति के नए माध्यमों, उनकी सामाजिक संवेदनशीलता तथा राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रति उनकी सजगता को वर्तमान समय के महत्वपूर्ण बदलावों के रूप में रेखांकित किया है।
Gen-Z Movement Discussion : छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन के प्रमुख नेता रहे सामाजिक कार्यकर्त्ता डॉ. उदयभान सिंह चौहान ने जेन-जी आंदोलन के संदर्भ में लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नई पीढ़ी की भागीदारी के महत्व पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि किसी भी सामाजिक परिवर्तन को स्थायी और रचनात्मक दिशा देने के लिए उसमें परम्परा , अनुभव और नई चेतना और समझदारी के साथ भागीदारी ज़रूरी है।
Gen-Z Movement Discussion : कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए छत्तीसगढ़ी समाज के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सत्यजीत साहू ने कहा कि लोकतंत्र में मौजूद विभिन्न आवाजों का सामाजिक एकत्रीकरण बहुत ज़रूरी है । उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति केवल संस्थाओं में नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों, विचारों और अनुभवों को संवाद के एक साझा मंच पर लाने में है।
Gen-Z Movement Discussion : कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिथियों द्वारा ‘दोस्त ‘संस्था की नवनियुक्त अध्यक्ष डॉ. संगीता कौशिक तथा ‘प्योर’ संस्था की नवनियुक्त अध्यक्ष सुश्री स्वाति देवांगन का शॉल एवं श्रीफल से सम्मान किया गया। इस अवसर पर दोनों संस्थाओं की नई जिम्मेदारियों के लिए उन्हें शुभकामनाएं दी गईं। कार्यक्रम का आरंभ एडवोकेट संतोष ठाकुर द्वारा किया गया। उन्होंने उपस्थित अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्य और इसकी प्रासंगिकता को सामने रखा।
Gen-Z Movement Discussion : कार्यक्रम में युवा कवि तारिक खान ने अपने काव्य-पाठ से समां बाँधा और परिचर्चा को एक रचनात्मक और रोचक आयाम प्रदान किया। उन्होंने अपने अंदाज में विभिन्न रचनाओं का पाठ किया, जिन्हें उपस्थित श्रोताओं ने सराहा। उनके काव्य-पाठ ने कार्यक्रम के गंभीर वैचारिक वातावरण में संवेदना और सृजनात्मकता का सुंदर समावेश किया।
Gen-Z Movement Discussion : परिचर्चा में सामाजिक, साहित्यिक,सांस्कृतिक, पत्रकारिता, चिकित्सा एवं बौद्धिक क्षेत्र से जुड़े अनेक नागरिक उपस्थित रहे। इनमें सूरज दुबे, आचार्य रितेश्वरानंद अवधूत, के. पी. सिंह, आलोक पुतुल, जी. पी. चंद्राकर, किशन देवांगन, गुलशन मानसरोवर सहित अनेक प्रबुद्ध नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे । इस कार्यक्रम ने नई पीढ़ी और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया तथा इस बात को रेखांकित किया कि भारत में सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया निरंतर गतिशील है और प्रत्येक पीढ़ी इस यात्रा में अपनी नई भूमिका निर्धारित करती है।









