रायपुर। No Ayushman in private hospitals:  एसोसियेशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ़ इंडिया (एएचपीआई) की आज आयोजित छत्तीसगढ़ स्तरीय सामान्य सभा की बैठक में आयुष्मान योजना में लगातार आ रही परेशानियों के बारे में विस्तृत विचार विमर्श हुआ। पूरी बातचीत के केंद्र बिंदु में आयुष्मान योजना संचालित कर रही स्टेट नोडल एजेंसी की असंतोषजनक कार्यप्रणाली पर सदस्यों ने गहरी चिंता व्यक्त की।

No Ayushman in private hospitals:  सभी सदस्यों ने एक स्वर में बताया कि आयुष्मान योजना में पिछले 7 वर्षों मैं पैकेज दर बढ़ाई नहीं गई है जबकि प्रतिवर्ष चिकित्सा दरों में बढ़ोतरी की दर 12% से अधिक है। यहां तक की 2022 में नेशनल हेल्थ अथॉरिटी की अनुशंसा भी नहीं लागू हो पाई है। एएचपीआई छत्तीसगढ़ चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि बैठक में सदस्यों ने एक स्वर में सुझाव दिया है कि स्वास्थ्य विभाग से निम्न बिंदुओं पर बातचीत की जाए।

No Ayushman in private hospitals:   इनका कहना है कि विभिन्न बीमारियों के आयुष्मान योजना की बढ़ी हुई दरों को लागू किया जाए। इस हेतु राज्य स्तर से विभिन्न विशेषज्ञों को लेकर सरकारी एवं निजी क्षेत्र से विशेषज्ञों की कमेटी बनाएं जो तार्किक आधार पर पैकेज रेट की एक मुश्त बढ़ोतरी का सर्वसम्मत प्रस्ताव करें। इन पैकेज दर की वार्षिक बढ़ोतरी का प्रावधान सुनिश्चित किया जाए।

No Ayushman in private hospitals:   जिला और राज्य स्तरीय शिकायत निवारण समितियों में पुनर्जीवित केस 2022, 23 और 24 की अनुशंसा के अनुसार सभी अस्पतालों को लंबित भुगतान किए जाएं। जिला और राज्य स्तर पर इलाज करा कर अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुके मरीज की ऑडिटिंग के लिए विभिन्न स्तरों में विशेषज्ञों की टीम बनाई जाए ताकि पारदर्शी तरीके से 45 दिन के भीतर केस का निपटारा स्टेट नोडल एजेंसी के सहायता से किया जा सके। इससे योजना के विश्वसनीयता में बढ़ोतरी होगी । 45 दिन के बाद लंबित भुगतान होने पर नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के अनुशंसा के अनुसार एक प्रतिशत ब्याज का प्रावधान तुरंत लागू किया जाना चाहिए।

No Ayushman in private hospitals: जनवरी से मार्च 2025 और जुलाई 25 तक की लंबित भुगतान न होने की स्थिति में सांकेतिक रूप से राज्य स्तरीय बंद करने की विचार विमर्श की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि इस विषय में एएचपीआई के राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा अन्य राज्यों से समन्वय बनाते हुए सभी राज्यों की समस्याओं को एक प्लेटफार्म पर लाते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से संवाद करते हुए तार्किक हल निकाला जायेगा जिससे वंचित वर्गों को इलाज में कठिनाई न हो।

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