Smart City in the Rain : बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के दूसरे बड़े स्मार्ट शहर बिलासपुर का 12 घंटे की बारिश में जो हाल है, उसे देखकर कोई भी यही कहेगा कि स्मार्ट शहर ऐसा ही होता है तो बेहतर है यह न हो। शहर में चारों तरफ जलभराव की जैसी स्थिति है, उसमें शहरवासियों का जीना मुहाल हो गया है। लोगों के घरों में पानी भर गया है और पूरे परिवार को पानी निकालने में लगना पड़ा है। मौसम विभाग ने अगले 12, घंटे तक बारिश की चेतावनी दी है। समझा जा सकता है कि ये 12, घंटे कितने कठिन होने वाले हैं।
Smart City in the Rain : कल रात से आज सुबह तक की तेज बारिश ने रोज के काम में जुटने से पहले लोगों को परेशान कर दिया। आम लोग ही नहीं प्रशासन के अधिकारियों तक को राहत उपायों में लगना पड़ा। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने सभी निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिए। स्कूलों में छुट्टी कर दी गई। अधिकारियों से कहा गया कि वे बारिश से उपजी स्थिति पर नजर रखें। पुलिस को संरक्षित आवागमन की निगरानी में लगाना पड़ा। ऐसा इसलिए कि पूरे शहर में सड़कें डूब गईं और लोगों के लिए घरों से निकलना दूभर हो गया।
पंप लगाकर निकाला कमिश्नर बंगले से पानी
Smart City in the Rain : ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब शहर के लोगों को जलभराव की विकट समस्या से गुजरना पड़ा। लोगों ने समझा था कि अब शहर स्मार्ट हो गया है, कम से कम जलभराव की पहले जैसी स्थिति नहीं होगी पर यहां तो स्थिति और भी विकट थी। नगर निगम कमिश्नर के बंगले से पंप लगाकर पानी निकालना पड़ा। इस स्मार्ट शहर में पानी निकासी की ऐसी व्यवस्था है। शायद इन्हीं सब कारणों से शहर की स्वच्छता रैंकिंग भी गिरी है।

छोटे शहरों वाली समस्या
आम तौर पर अनियोजित ढंग से बसे छोटे शहरों में इस तरह की समस्या देखी जाती है। स्मार्ट सिटी परियोजना में शामिल किसी शहर में इसकी कल्पना नहीं की जा सकती। नगर निगम बारिश के दिनों में जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए नालों की सफाई से लेकर तमाम उपाय करता है ताकि लोगों को परेशानी न हो। 12 घंटे की बारिश में जलभराव की जिस स्थिति का सामना लोगों को करना पड़ा , उसे देखकर लोग नगर निगम की व्यवस्था पर हंस तो नहीं सकते । कम से कम अधिकारियों को अब यह देखना चाहिए कि आने वाले दिनों में वे लोगों को इस स्थिति से कैसे राहत पहुंचा सकते हैं।
मास्टर प्लान दरकिनार
बिलासपुर शहर तेजी विस्तार ले रहे शहरों में शामिल है। विस्तार के साथ समस्याएं भी बढ़ी हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह शहर के मास्टर प्लान पर ठीक से काम न होना है। अवैध बसावटों को रोका नहीं जा सका है। शहर के कई हिस्सों में ऐसी टेढ़ी-मेढ़ी सड़कें मिल जाएंगी, जहां से पानू की निकासी के लिए ठीक से नालियों का निर्माण नहीं कराया जा सकता। मास्टर प्लान में ग्रीन जोन घोषित क्षेत्र में बस्तियां बसा दी गईं। जिस हिस्से में 80 फीट की सड़कें इसलिए कम कर दी गईं क्योंकि सरकार को सड़क के लिए जमीन अधिग्रहित करने पर मुआवजू कम देना पडे़े । अगर शहर के विकास के मामले में विकास में इस तरह समझौते किए जाएं और मास्टर प्लान को दरकिनार कर दिया जाए तो उसका खामियाजा तो भुगतना ही पड़ेगा।









