Skip to content
  • https://www.facebook.com/
  • https://twitter.com/
  • https://t.me/
  • https://www.instagram.com/
  • https://youtube.com/

fourthline.in

fourthline.in

  • देश
  • विदेश
  • छत्तीसगढ़
  • रायपुर
  • बिलासपुर
  • दुर्ग
  • सरगुजा
  • बस्तर
  • धर्म-संस्कृति
  • साहित्य
  • खेल
  • देश
  • विदेश
  • छत्तीसगढ़
  • रायपुर
  • बिलासपुर
  • दुर्ग
  • सरगुजा
  • बस्तर
  • धर्म-संस्कृति
  • साहित्य
  • खेल
Subscribe
Close

Search

Home/छत्तीसगढ़/CG High Court: हाईकोर्ट में सरकार का तर्क मंजूर, पदोन्नति कर्मचारियों का मौलिक अधिकार नहीं , याचिकाएं खारिज
छत्तीसगढ़

CG High Court: हाईकोर्ट में सरकार का तर्क मंजूर, पदोन्नति कर्मचारियों का मौलिक अधिकार नहीं , याचिकाएं खारिज

Avatar photo
By fourthline.in
September 6, 2025 2 Min Read
0

बिलासपुर।  CG High Court:  सचिवालय सेवा भर्ती नियम 2012 में किए गए संशोधन को संवैधानिक मानते हुए कर्मचारियों की ओर से दाखिल सभी याचिकाओं को हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि पदोन्नति कर्मचारियों का मौलिक अधिकार नहीं है, बल्कि यह केवल विचार किए जाने का अवसर है।

CG High Court:  इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल और न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल की डीबी में हुई।  राज्य सरकार ने 14 जून 2021 को अधिसूचना जारी कर संयुक्त सचिव, उप सचिव, अवर सचिव और अनुभाग अधिकारी के पदों पर पदोन्नति के लिए स्नातक डिग्री अनिवार्य कर दी थी। इस संशोधन को मंत्रालय में कार्यरत अनुभाग अधिकारी, असिस्टेंट ग्रेड-1 समेत अन्य कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में यह कहते हुए चुनौती दी कि सेवा के अंतिम चरण में नियम बदलना अनुचित है। वे वर्षों से फीडर पदों पर काम कर रहे हैं, कई तो सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। उनका तर्क था कि यह संशोधन संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है और सरकार ने अतिरिक्त योग्यता अनिवार्य करने का कोई ठोस कारण नहीं बताया है।

CG High Court:  सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने जवाब में कहा कि उच्च पदों पर अधिक जिम्मेदारियां होती हैं, इसलिए स्नातक डिग्री जैसी न्यूनतम योग्यता जरूरी है। पदोन्नति कर्मचारियों का अधिकार नहीं है, बल्कि केवल नियमों के आधार पर अवसर है। नियमों में संशोधन करना उसका विशेषाधिकार है और यह न तो मनमाना है और न ही अवैध। कोर्ट ने सरकार के तर्कों से सहमति जताते हुए कहा कि किसी कर्मचारी की व्यक्तिगत कठिनाई से कोई कानून असंवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता। पदोन्नति का कोई मौलिक अधिकार नहीं है। स्नातक डिग्री को अनिवार्य करने वाला संशोधन न भेदभावपूर्ण है और न ही संविधान का उल्लंघन।

Tags:

CG High Court Promotion Not Fundamental Right Government Argument Accepted Employee Petitions Dismissed Service Rules Employment Law Chhattisgarh News
Avatar photo
Author

fourthline.in

Follow Me
Other Articles
Previous

Medical student Suicide : मेडिकल के छात्र ने परीक्षा से पहले हॉस्टल में लगाई फांसी

Next

DA will increase:  दिवाली से पहले DA में बढ़ोतरी की तैयारी, 1.2 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनरों को मिलेगा फायदा

No Comment! Be the first one.

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • BJP Organisation : भाजपा संगठन में किया गया फिर बड़ा बदलाव, कर्मवीर बने छत्तीसगढ़ प्रदेश महामंत्री, सौदान सिंह को भी मिली बड़ी जिम्मेदारी
  • CG JUDO Strike : जूनियर डाक्टरों ने किया ओपीडी बहिष्कार का ऐलान, स्वास्थ्य मंत्री से बातचीत बेनतीजा
  • Jhiram Ghati Incident : झीरमकांड के दोषियों ने NIA कोर्ट से मिली फांसी की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में दाखिल की अपील
  • Weather Update: विदाई से पहले ओडिशा , आंध्र में मानसून का कहर, भारी बारिश से कई पुल बहे, बस्तर में स्कूलों में छुट्टी, जगदलपुर से हैदराबाद फ्लाइट कैंसिल
  • Jharkhand News: करमा पूजा की खुशियां मातम में बदलीं, कोयल नदी में डूबे 5 बच्चे, 4 की मौत, एक की तलाश जारी
Copyright 2026 — . All rights reserved. Blogsy WordPress Theme