High Court’s verdict : जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने जेल सुधार और कैदियों के पुनर्वास की दिशा में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। जोधपुर की मंडोर ओपन जेल में पहली बार दो उम्रकैद की सजा काट रहे दोषियों को विवाह की अनुमति दी गई है।

High Court’s verdict:  न्यायमूर्ति डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने कहा कि विवाह करना और सम्मान के साथ जीवन जीना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जेल का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि कैदियों का सुधार और पुनर्वास भी है। 


High Court’s verdict : नागौर निवासी मूलाराम भाटी और मुंबई की रहने वाली सीमा मंडोर ओपन जेल में खेती का काम करते हुए एक-दूसरे के करीब आए। धीरे-धीरे दोनों ने शादी करने का फैसला किया। हाल ही में सीमा को 40 दिन की पैरोल मिली, जिसके बाद दोनों ने हाईकोर्ट से विवाह की अनुमति मांगी। राज्य सरकार ने भी इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई।

High Court’s verdict :   हाईकोर्ट की मंजूरी के बाद 22 जुलाई को मंडोर ओपन जेल परिसर में जेल प्रशासन की निगरानी में दोनों का विवाह कराया जाएगा। यह राजस्थान के इतिहास में पहली बार होगा, जब किसी ओपन जेल के भीतर विधिवत शादी होगी। विवाह समारोह में सीमा की सहेली के पिता कन्यादान करेंगे, क्योंकि उनके परिवार की ओर से कोई मौजूद नहीं रहेगा।

High Court’s verdict : कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला जेल सुधार व्यवस्था के लिए एक नई मिसाल है। इससे यह संदेश जाता है कि अच्छे आचरण वाले कैदियों को समाज में सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत करने का अवसर मिलना चाहिए।

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