Compromising on construction :   बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में सड़कों के निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे हैं। पृथक छत्तीसगढ़ के गठन के साथ इस पर बड़ी बहस शुरू हुई थी।  अजीत जोगी के नेतृत्व में पहली सरकार ने सत्ता संभाली थी और तरूण चटर्जी पहले लोक निर्माण मंत्री बने थे। उस समय सड़कों की हालत बेहद ख़राब थी। अजीत जोगी सरकार ने सड़कों के मामले में बड़ा निर्णय लेते हुए नार्थ – साउथ कारिडोर के निर्माण की घोषणा की। यह उनकी ही सरकार की नीति थी कि कोई सड़क समय से पहले खराब हुई तो निर्माण करने वाली एजेंसी को अपने खर्च पर उसकी मरम्मत करनी होगी।

Compromising on construction :  सरकार के इस निर्णय से सड़कों के निर्माण की गुणवत्ता में सुधार भी आया, लेकिन इस समय राज्य में सड़कों की जो स्थिति है, उससे तो यही पता चलता है कि निर्माण की गुणवत्ता की सारी बातें कल की हो चुकी हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग का हाल जब बुरा हो तो स्टेट हाइवे या आम सड़कों की बात करना ही बेमानी लगती है। छत्तीसगढ़ के दो बड़े शहरों राजधानी रायपुर और न्यायधानी बिलासपुर को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग बनने के बाद से उसकी सालों भर मरम्मत होती आ रही है। कोई कह नहीं सकता कि वह इस राष्ट्रीय राजमार्ग से एक दिन भी गड्ढों को पार किए गुजरा हो। रखरखाव का काम भी ऐसा जैसे खानापूर्ति की जा रही हो।

Compromising on construction :   यह दौर नया है और लोगों की राजनीतिक चेतना नई करवट ले चुकी है। पहले यह माना जाता था कि काम का अच्छा -बुरा होना , देखने का काम सरकार है, लेकिन इस  दौर में यह का लोग खुद भी देखने लगे हैं । सड़कों की स्थिति को लेकर विरोध प्रदर्शनों में यह देखा जा सकता है। इसे सिर्फ राजनीति से प्रेरित प्रदर्शन मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसकी हकीकत की भी खबर लेना जरूरी है। इस समय राज्य में कई सड़कों के निर्माण का काम चल रहा है। निर्माण एजेंसियों ने यह तक नहीं देखा कि काम की गति कैसी होनी चाहिए। हालत यह है कि इस बारिश में आधा -अधूरा काम करके छोड़ देने से लोगों को निर्माणाधीन सड़कों पर जान जोखिम में डालकर चलना पड़ रहा है।

Compromising on construction : किसी सड़क के निर्माण की यह गाइडलाइन तो होती ही होगी कि मौसम का ध्यान रखना होगा ताकि किसी सड़क पर आवागमन असुरक्षित अथवा बंद न हो। जिस सड़क पर ऐसी स्थिति है, उस निर्माण एजेंसी की कुशलता निश्चय ही संदिग्ध है और उसके काम की गुणवत्ता पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। विरोध प्रदर्शनों में यह बात भी छिपी हुई है, जिसे देखने की कोशिश सरकार के प्रशासनिक अमले को करनी चाहिए । यह अमला अपनी जिम्मेदारी ठीक से निभाएं तो कहीं किसी गड़बड़ी की गुंजाइश ही नहीं रहे पर सच तो यह कि उसने ही गुणवत्ता से समझौता कर लिया है।

Compromising on construction :   दो दिन पहले छत्तीसगढ़ को झारखंड से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 243 स्थित राजपुर में लोगों ने सड़क पर बेशर्मी का पौधा रोपकर अपना विरोध प्रदर्शित किया। कहने को तो यह कांग्रेस का प्रदर्शन था, लेकिन इसमें आम लोगों पीड़ा भी छिपी हुई थी। हाल ये है कि अम्बिकापुर से झारखंड सीमा से सटे शहर रामानुजगंज तक  सड़क ही नहीं बची है। नए पुलों का निर्माण हुआ ही नहीं और पुराने पुलों की मरम्मत का काम भी बंद कर दिया गया। यह बात समझी जा सकती है कि जब नई सड़क और पुलों का निर्माण होना  है तो पुरानै सड़क या पुलों की मरम्मत पर क्यों खर्च किया जाए ? यहां ध्यान देने वाली बात यह कि कोई बड़ा हादसा हो जाए तब भी  क्या यही बात सोची जाएगी ?

Compromising on construction :   उधर गरियाबंद में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क पर भी ग्रामीणों ने बेशर्म का पौधा रोपकर सड़क की जर्जर स्थिति पर विरोध जताया। 68 लाख की लागत से तीन साल में यह सड़क बनकर तैयार हुई थी और सालभर में यह चलने लायक नहीं रह गई । अपनी गाढ़ी कमाई की ऐसी बर्बादी जनता बर्दाश्त नहीं कर सकती। केवल सड़कों का ही निर्माण नहीं बल्कि हर सरकारी निर्माण में ऐसी बर्बादी रोकी जानी चाहिए। वैसे भी लोक कल्याणकारी सरकार के लिए मजबूत और टिकाऊ अधोसंरचना उसकी प्राथमिकता होनी चाहिए।

Compromising on construction :  यह बात मानने में शायद ही किसी को संकोच होगा कि छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के समय निर्माण की गुणवत्ता पर जो बहस शुरू हुई थी, कालान्तर में उससे आगे बढ़ने की कोशिश की गई होती तो सड़कों पर बने गड्ढों में बेशर्म के पौधे रोपकर लोगों के विरोध प्रदर्शित करंने की नौबत ही नहीं आती।  निर्माण की गुणवत्ता पर  बहस चलती रहनी चाहिए थी ताकि सरकारी अमले को अहसास हो कि उसके काम पर भी नजर रखी जा रही है। निर्माण की गुणवत्ता पर उठ र से सवालों का जवाब खोजा जाना चाहिए। सड़कों पर उतरकर लोगों ने यही बताने की कोशिश की है।

Previous articleISRO EOS-05 Satellite Launch:   इसरो ने लांच किया 36,000 किमी से तस्वीरें लेने वाला पहला सैटेलाइट , आपदा से पहले करेगा अलर्ट
Next articleNepal disaster victims : रेडक्रास सोसाइटी बिलासपुर नेपाल आपदा पीड़ितों के लिए जुटाएगी सहायता राशि

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here