• अतुल कांत खरे
Sharadiya Navaratri : बिलासपुर (fourthline) । पूरे छत्तीसगढ़ में प्रसिद्ध वन देवी का मंदिर बिलासपुर के खमतराई में है, जहां खास तरह के पत्थरों का चढ़ावा मन्नत के लिए चढ़ाया जाता है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पत्थर चढ़ाने आते हैं । किंवदंती है कि हजारों साल पहले एक चरवाहे को माता ने दर्शन देकर पत्थर चढ़ाने को कहा था तब से यहां पत्थर चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है।
Sharadiya Navaratri : बिलासपुर जिले के सरकंडा अशोक नगर खमतराई क्षेत्र में मां बगदाई मंदिर वन देवी को समर्पित एक अत्यंत प्रसिद्ध और अनोखा मंदिर है। यहां कंकड़ पत्थर अर्पित किए जाते हैं। यहां किसी किस्म का प्रसाद नहीं चढ़ाया जाता। यह माना जाता है कि माता बागदाई किसी महंगे भोग प्रसाद की नहीं बल्कि सच्चे प्रेम और श्रद्धा से प्रसन्न होती हैं। किंवदंती के अनुसार सदियों पहले जब यह क्षेत्र घना जंगल था तब एक चरवाहे को जागृत प्रतिमा मिली थी। उस समय चरवाहे के पास चढ़ाने के लिए कुछ भी नहीं था। माना जाता है कि माता ने ही उसे प्रोत्साहित किया कि आसपास जो कुछ भी है वही चढ़ा दे तब चरवाहे ने कंकड पत्थर चढ़ा दिए तब से ही यह अनूठी परंपरा चली आ रही है।

खास तरह के पत्थरों का चढ़ावा
इस मंदिर में खास तरह के पत्थर चढ़ते हैं जो खेतों में मेड़ के पास पाए जाते हैं और जिन में जड़नुमा आकृति होती है ।श्रद्धालु अन्य कोई किसी प्रकार का अन्य पत्थर नहीं चढ़ा सकते। यह विशेष पत्थर मंदिर की प्रबंध समिति श्रद्धालुओं के लिए मंदिर परिसर में ही उपलब्ध कराती है, जिसके लिए मामूली अंशदान लिया जाता है
होती है मन्नत पूरी
श्रद्धालु अपनी मन्नत के साथ पांच पत्थर चढ़ाते हैं और जब मन्नत पूरी हो जाती है तो दोबारा पांच पत्थर चढ़ाने के लिए आते हैं। यहां का नवरात्रि मेला पूरे छत्तीसगढ़ में प्रसिद्ध है। इस दौरान पूरे छत्तीसगढ़ से श्रद्धालु यहां पत्थर चढ़ाने के लिए पहुंचते हैं और मेला सा लग जाता है। यूं तो यहां पूरे वर्ष वर्ष श्रद्धालु आते हैं परंतु शारदीय नवरात्रि में विशेषतौर से दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। यहां सावन में मेला भी लगता है। इस दौरान विशेष पूजा अर्चना की जाती है। इस मंदिर परिसर में द्वादश ज्योतिर्लिंग, राम दरबार, हनुमान और शनिदेव का मंदिर भी है। यहां के पंडित श्री रामजी बताते हैं कि मंदिर का पुनर्निर्माण मस्तूरी के ठाकुर परिवार ने कराया। साथ ही पटेल परिवार ने ₹6 लाख देकर मंदिर को नया रूप दिया । अनेक किवदंतियों के साथ इस मंदिर में बहुत से श्रद्धालुओं की मन्नत पूरी हुई है । इस बार सावन मास में बहुत से श्रद्धालुओं ने यहां पत्थर चढ़ाए।

षाटन देवी मंदिर में श्रद्धालु चढ़ाते हैं लौकी
छत्तीसगढ़ में रतनपुर का षाटन देवी का मंदिर अनोखा मंदिर है। जहां इन नौ दिनों में देवी को केवल लौकी चढ़ाई जाती है। ।,संस्कृत महाविद्यालय की पूर्व प्राचार्य डॉ प्रभा व्यौहार बताती हैं मध्य प्रदेश के कुछ मंदिर हैं, जहां नारियल नहीं चढ़ाया जाता। कोलकाता के चाइनीस काली मंदिर में चाऊमीन नूडल्स और मैगी, फ्राइड राइस, पास्ता, मैगी चढ़ाई जाती है ।इसके अलावा कोई अन्य प्रसाद नहीं चढ़ाया जाता। गुजरात के वडोदरा में मोती बहू चराजी मंदिर है, जहां शराब चढ़ाई जाती है। शराब के अतिरिक्त कोई अन्य चीज नहीं चढ़ाई जा सकती। इस मंदिर में गर्भवती महिलाओं से जुड़ी एक अनोखी परंपरा है। गर्भवती महिलाओं को अच्छी संतान के लिए यहां शराब पिलाई जाती है। ऐसे ही एक जीजाबाई मंदिर है, जहां जूते और चप्पल प्रसाद के रूप में चढ़ाए जाते हैं । इसी तरह कामाख्या देवी में अंबुबाची वस्त्र चढ़ाया जाता है। डा व्यौहार बताती हैं संस्कृत के श्लोक के साथ देवी को प्रसाद चढ़ाया जाए तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परिपूर्ण माना जाता है, लेकिन आजकल लोग संस्कृत का उच्चारण भूलते जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बस्तर के कांगेर वैली नेशनल पार्क के पास माता की यात्रा में काला चश्मा चढ़ाने की परंपरा है इसके अतिरिक्त कुछ और नहीं चढ़ाया जा सकता।

