MP’s Privilege : रायपुर। छत्तीसगढ़ में क्या अफसरशाही बेलगाम हो गई है। राज्य के सत्तारूढ़ पार्टी के ही दो सांसदों ने तीन आईएएस अधिकारियों के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष को विशेषाधिकार हनन की शिकायत सौंपी है। पहले सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने और अब सांसद विजय बघेल ने यह शिकायत की है। दोनों ही मामलों में लोकसभा अध्यक्ष की ओर से सरकार से जवाब तलब किया गया है।
MP’s Privilege : बृजमोहन अग्रवाल की विशेषाधिकार हनन की शिकायत में राज्य के स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया के व्यवहार का जिक्र किया गया है और कहा गया है कि विभाग से जुड़ी जानकारी मांगने पर उन्होंने जानकारी नहीं दी। यही नहीं फोन पर कथित रूप से यह तक कह दिया कि जो करना हो कर लो। इधर दुर्ग के सांसद विजय बघेल ने भिलाई के तत्कालीन आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय और चरोदा नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त डीएस राजपूत के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की लोकसभा अध्यक्ष को शिकायत सौंपकर राज्य की अफसरशाही को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।
MP’s Privilege : सांसदों की ओर से विशेषाधिकार हनन की इन शिकायतों से संदेश यह जा रहा कि क्या सचमुच राज्य में अफसरशाही बेलगाम हो गई है। शिकायत करने वाले दोनों सांसद राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा के वरिष्ठ राजनेताओं में शामिल हैं और इनकी शिकायतों को अधिकारी विशेष के प्रति किसी पूर्वाग्रह से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। ऐसे में प्रश्न उठता है कि आखिर इन सब परिस्थितियों के पीछे असली वजह क्या है ?
MP’s Privilege : अब सांसदों के विशेषाधिकार हनन की शिकायतों पर सरकार को जवाब देना है। अगर सांसद विपक्षी पार्टियों के होते तो इसमें राजनीति देखी जा सकती थी, यहां तो दोनों ही सा़ंसद सत्तारूढ़ पार्टी के ही है। इसका साफ संकेत यही है कि सरकार में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। सत्ता और संगठन में समन्वय पर बहस पहले से छिड़ी हुई है। इसी मुद्दे पर पिछले दिनों मुख्यमंत्री निवास में लंबी बैठक भी हुई थी, जिसमें पार्टी पदाधिकारियों ने मंत्रियों के कार्य – व्यवहार पर सवाल उठाए थे।
MP’s Privilege : कोई एक सांसद अगर सवाल उठाया होता तो इस अपवाद के रूप में भी भी लिया जा सकता था, यहां तो दो-दो सांसदों ने अफसरशाही को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अगर अधिकारी सांसद की नहीं सुन रहे हैं, उनका फोन रिसीव नहीं कर रहे हैं तो समझा जा सकता है कि वे आम लोगों की बात कितनी सुन रहे होंगे ! कोई सांसद अपनी ही पार्टी की सरकार की नौकरशाही पर भरसक सवाल नहीं उठाता, यहां तो दो सांसदों ने सवाल उठाकर बहुत कुछ कह दिया है। सत्ता और संगठन दोनों के लिए यह चिंता की बात होनी चाहिए।









