•अजय गुप्ता
Urban Local Body Elections : सूरजपुर।जिले में शिवनंदनपुर नगर पंचायत का पहला चुनाव अब सिर्फ अध्यक्ष और पार्षद चुनने तक सीमित नहीं रह गया है,बल्कि भाजपा और कांग्रेस के बीच प्रतिष्ठा की सीधी लड़ाई बन गया है। नामांकन के बाद यहां की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। एक ओर भाजपा जहां सरकार की योजनाओं और संगठन के दम पर जीतना चाहती है, तो दूसरी ओर कांग्रेस इस चुनाव को जनता के बीच अपनी बढ़ती ताकत साबित करने का मौका मान रही है। भीषण गर्मी के बीच नेताओं की बढ़ती सक्रियता बता रही है कि शिवनंदनपुर का यह चुनाव छोटा जरूर है, लेकिन इसकी राजनीतिक अहमियत काफी बड़ी हो चुकी है।

Urban Local Body Elections :  ग्राम पंचायत से नगर पंचायत बने शिवनंदनपुर में पहली बार चुनाव हो रहा है। अध्यक्ष पद के लिए भाजपा ने रितेश जायसवाल पर भरोसा जताया है, जबकि कांग्रेस ने संजय सोनी को मैदान में उतारकर मुकाबले को सीधा और रोचक बना दिया है। 15 वार्डों वाले इस नगरीय निकाय में कुल 4642 मतदाता हैं और 1 जून को मतदान होना है। नामांकन पश्चात अब प्रत्याशी और समर्थक घर-घर पहुंचकर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में जुटे हुए हैं। यहां टिकट वितरण के बाद दोनों ही दलों में हल्का असंतोष भी देखने को मिला, लेकिन फिलहाल भाजपा और कांग्रेस दोनों दल  एकजुटता का संदेश देने में लगे हैं। टिकट नहीं मिलने से नाराज दावेदारों को मनाने की कोशिश लगातार जारी है, क्योंकि छोटे निकाय चुनावों में स्थानीय नाराजगी कई बार पूरे चुनावी समीकरण को बदल देती है।

Urban Local Body Elections :   भाजपा ने इस चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी है। जिले के प्रभारी मंत्री दयाल दास बघेल, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद चिंतामणि महाराज, विधायक भूलन सिंह मरावी, रामसेवक पैकरा और मुरली मनोहर सोनी जैसे वरिष्ठ नेताओं की लगातार सक्रियता इस चुनाव की अहमियत को और बढ़ा रही है। भाजपा कार्यकर्ता वार्ड-वार्ड पहुंचकर चुनावी माहौल अपने पक्ष में करने में जुटे हुए है। वहीं कांग्रेस भी पीछे नहीं है। पूर्व मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह, अमरजीत भगत, सुभाष गोयल और शशि सिंह जैसे बड़े नेताओं की लगातार आमद और सक्रियता यह संकेत दे रही है कि कांग्रेस इस चुनाव को पूरी गंभीरता से लड़ रही है। कांग्रेस स्थानीय मुद्दों और जनसंपर्क के सहारे भाजपा को कड़ी चुनौती देने की कोशिश में लगी हुई है।

Urban Local Body Elections :   इधर आम आदमी पार्टी ने भी उम्मीदवार उतारकर चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है। हालांकि राजनीतिक जानकार मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही मान रहे हैं। छोटे चुनावों में तीसरे उम्मीदवार की मौजूदगी हार-जीत का अंतर तय कर देती है, इसलिए दोनों बड़े दल हर वोटरों को साधने में जुटे हैं।यहां15 वार्डों में से करीब 7 से 8 वार्ड ऐसे हैं , जहां ग्रामीण परिवेश और सामाजिक समीकरण काफी प्रभावी माने जा रहे हैं। बस्ती और ग्रामीण वोट इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। माना जा रहा है कि जो प्रत्याशी इन वर्गों को अपने पक्ष में करने में सफल होगा, उसकी जीत की संभावना मजबूत हो जाएगी। फिलहाल शिवनंदनपुर में चुनावी माहौल पूरी तरह गरमा चुका है। विकास, संगठन, स्थानीय समीकरण और राजनीतिक प्रभाव सभी मुद्दे इस चुनाव में दिखाई दे रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि जनता सत्ता के साथ जाती है या बदलाव के संदेश को ताकत देती है।

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