• योग दिवस 21 जून पर विशेष
•अतुल कांत खरे
बिलासपुर( fourthline) । आज समाज में बढ़ते हुए तनाव डिप्रेशन और मोबाइल के कारण आ रही आंखों की कमजोरी ,ठीक करने के लिए प्राचीन पद्धति त्राटक एक बेहतरीन उपाय है । बिलासपुर की योग गुरु डॉ, मोनिका पाठक बताती हैं कि त्राटक क्रिया एक प्राचीन योग पद्धति है, जिसमें किसी एक बिंदु या मोमबत्ती या दीए की लौ को बिना पलक झपके तब तक देखते हैं जब तक आंखों में पानी ना आ जाए ।
Yoga practice ‘Trataka’ : यह एकाग्रता बढ़ाने, आंखों की रोशनी में सुधार करने और मानसिक शांति प्रदान करने के लिए बहुत ही शक्तिशाली अभ्यास है । इसके लिए ब्रह्म मुहूर्त सबसे अच्छा होता है। सुखासन या पद्मासन में रीढ की हड्डी सीधी करके बैठकर एक लक्ष्य की स्थापना करते हैं। मोमबत्ती या दीए को अपनी आंख की बिल्कुल स सीध में डेढ़ से 2 फीट की दूरी पर रखते हैं । पूरा फोकस लौ पर होता है और कोशिश यह करना पड़ती है कि पलकें न झपके।

Yoga practice ‘Trataka’ : यह क्रिया स्मरण शक्ति को भी बढाती है ।आंखों के लिए एक टानिक का काम करती है और मांसपेशियों को मजबूत करती है इसमें गहराई पर जाने से डिप्रेशन और एंजायटी ठीक होने लगती है । डा,पाठक बताती हैं की त्राटक में लोगों की दिलचस्पी तेजी से बढी़ है ।शुद्ध योग केंद्र में त्राटक का एक विशेष योग समूह है जो सायं काल ऑनलाइन चलता है, जिसमें बहुत से साधक भाग लेते हैं और बहुत से साधकों को इससे अनेक प्रकार के लाभ हुए हैं ।
नियमित ,त्राटक से हुआ लाभ
वैशाली सोनी बताती हैं – इससे उनकी एकाग्रता बढी है और चिंता कम हुई है ।श्याम सुंदर अरोड़ा को भी इससे काफी लाभ हुआ है । वह भी नियमित त्रटक कर रहे हैं । त्राटक के सत्र में डॉक्टर पाठक के साथ राखी मानिकपुरी, मुनमुन केसरी, श्वेता सुमन और भूपेंद्र कर्श् सहयोग करते हैं ।विपश्यना से जुड़े भरत चांदनी बताते हैं त्राटक एक महत्वपूर्ण क्रिया है जिसे ध्यान साधना में बहुत अच्छी मदद मिलती है और योगी धीरे-धीरे अपने लक्ष्य को पा लेते हैं. विपश्यना से जुड़े उमेश सिहोते बताते हैं की त्राटक साधना करने से आंखों की शक्ति बढ़ती है और चश्मे का नंबर धीरे-धीरे कम होने लगता है.
• उल्लेखनीय है कि डॉ मोनिका पाठक ने त्राटक में पीएचडी की है और त्राटक का स्टैंड भी पेटेंट कराया है, जो बिलासपुर की महत्वपूर्ण उपलब्धि है.










