Religious conversion controversy: कांकेर । अंतागढ़ विकासखंड के बड़े तेवड़ा गांव में आयोजित विशेष ग्राम सभा में 14 मतांतरित लोगों के अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र निरस्त करने का संकल्प प्रस्ताव पारित किया गया। इनमें गांव के पूर्व सरपंच रजमन सलाम का नाम भी शामिल है। इस मामले में सोमवार को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर प्रमाण पत्र निरस्त करने की मांग की जाएगी।
Religious conversion controversy: ग्राम सभा में सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय का उल्लेख किया गया जिसमें मतांतरित व्यक्ति का SC/ST दर्जा समाप्त होने की बात कही गई थी। साथ ही अप्रैल में लागू संशोधित छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य कानून का भी जिक्र हुआ, जिसमें अवैध मतांतरण पर 10 से 20 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।तेवड़ा के सरपंच सामसिंह सर्फे ने बताया कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र, पेसा कानून 1996 और छत्तीसगढ़ पेसा कानून 2022 के प्रावधानों के तहत विशेष ग्राम सभा बुलाई गई थी। बैठक में गांव के मतांतरित लोगों को लेकर चर्चा हुई और सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया।
Religious conversion controversy: प्रस्ताव में कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 342 के तहत गोंड समुदाय ST के रूप में अधिसूचित है। आरोप लगाया गया कि सूचीबद्ध 14 लोगों ने गोंड समाज की पारंपरिक रीति-रिवाज, धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक परंपराओं का त्याग कर ईसाई धर्म अपना लिया है।ग्राम सभा के मुताबिक ये लोग जन्म, विवाह और मृत्यु संस्कार ईसाई परंपराओं से कराते हैं। गोंड समाज के जतरा, देवस्थानों और पारंपरिक धार्मिक व्यवस्थाओं को नहीं मानते। गांव के पारंपरिक पुजारी, गायता और बैगा को भी स्वीकार नहीं करते। ग्राम सभा ने साफ किया कि वह इन 14 लोगों को गोंड समुदाय की मान्यता नहीं देती।
Religious conversion controversy: 681 की आबादी वाले बड़े तेवड़ा में वर्तमान में 14 लोग ही मतांतरित बताए जा रहे हैं। यह गांव पहले भी मतांतरण विवाद को लेकर चर्चा में रहा है। दिसंबर 2025 में पूर्व सरपंच रजमन सलाम के पिता के शव को दफनाने के मुद्दे पर गांव में हिंसक प्रदर्शन हुआ था। एडिशनल SP आशीष बंछोर समेत 30 से अधिक लोग घायल हुए थे। घटना के बाद मतांतरित परिवार गांव छोड़कर चले गए थे। वहीं लौटने पर 12 लोगों ने मूल धर्म में वापसी कर ली थी।










