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Home/छत्तीसगढ़/Down To Earth report : पिछले तीन वर्षों में पूरे देश में सबसे ज्यादा छत्तीसगढ़ में कटे पेड़ , अकेले सरगुजा में 4 लाख पेड़ों की कटाई
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Down To Earth report : पिछले तीन वर्षों में पूरे देश में सबसे ज्यादा छत्तीसगढ़ में कटे पेड़ , अकेले सरगुजा में 4 लाख पेड़ों की कटाई

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By fourthline.in
June 26, 2026 2 Min Read
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Down To Earth report : नई दिल्ली।  केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने जुलाई 2023 से मई 2026 के बीच वन भूमि डायवर्जन के तहत 28 लाख से ज्यादा पेड़ काटने की मंजूरी दी है। डाउन टू अर्थ की रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा पेड़ खनन परियोजनाओं के लिए काटे गए। पेड़ कटाई की मंजूरी के मामले में छत्तीसगढ़ देश में सबसे आगे रहा। अकेले केते एक्सटेंशन और एक कोल वाशरी के लिए चार लाख पेड़ काटने की मंजूरी दे दी गई।

Down To Earth report :  रिपोर्ट के मुताबिक, पेड़ काटने की मंजूरी के मामले में छत्तीसगढ़ सबसे आगे रहा। समिति ने सरगुजा डिवीजन में ‘केते एक्सटेंशन ओपनकास्ट कोल माइनिंग और पिट-हेड कोल वॉशरी प्रोजेक्ट’ के लिए 4 लाख से ज्यादा पेड़ों को काटने की मंजूरी दी। इस परियोजना का स्थानीय समुदायों ने जमीन और जंगल के अधिकारों को लेकर काफी विरोध किया था।

Down To Earth report :  डाउन टू अर्थ ने वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 के तहत बनी सलाहकार समिति की बैठकों के मिनट्स का विश्लेषण किया। रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय को वन भूमि डायवर्जन के 288 अलग-अलग प्रस्ताव मिले थे, जिनमें से 242 को मंजूरी दी गई। यानी मंजूरी की दर 80% से ज्यादा रही।

Down To Earth report :   इन तीन सालों में 22,000 हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि को खनन, पनबिजली और ट्रांसमिशन लाइनों जैसे गैर-वानिकी प्रोजेक्ट्स के लिए डायवर्ट किया गया।27 सेक्टरों में वन भूमि डायवर्ट की गई, लेकिन सबसे ज्यादा पेड़ खनन परियोजनाओं के तहत काटे गए – 13.5 लाख। इसके बाद हाइड्रोपावर परियोजना का नंबर आता है, जिसमें 9.3 लाख पेड़ काटने की मंजूरी मिली। पुनर्वास परियोजना में 2.3 लाख पेड़ शामिल थे।

Down To Earth report :   विश्लेषण में पाया गया कि कम से कम 84 परियोजनाओं में पेड़ काटने का कोई मामला नहीं था। वहीं 14 परियोजनाओं के मिनट्स में पेड़ काटने के आंकड़ों का जिक्र नहीं था। इनमें ओडिशा का सिजीमाली बॉक्साइट माइनिंग परियोजना भी शामिल है, जहां 708.204 हेक्टेयर वन भूमि साफ करने का प्रस्ताव है। वेदांता ग्रुप द्वारा संचालित इस खदान के मिनट्स में माना गया कि पेड़ों की गिनती हो रही है और असर पड़ सकता है, लेकिन सटीक संख्या का जिक्र नहीं था।

पेड़ काटने से होने वाले प्रभाव पर तर्क !

मिनट्स में दावा किया गया कि पेड़ काटने से पर्यावरण पर असर ‘बहुत कम’ होगा क्योंकि पठार का इकोसिस्टम ‘सीमित जैव-विविधता को सहारा देता है’। इसके उलट, उन्हीं मिनट्स में यह भी कहा गया कि घाटी के पास पेड़ काटने से वन्यजीवों के आवास पर असर पड़ सकता है, प्रजातियां विस्थापित हो सकती हैं, मिट्टी का कटाव बढ़ सकता है और जल-स्रोतों में गाद जमा हो सकती है।

Tags:

#DownToEarth #Chhattisgarh #Surguja #Hasdeo #TreeFelling #Deforestation #Environment #Forest #ClimateChange #CoalMining #Mining #GreenCover #Nature #CGNews
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