
Nepal Flood: रायपुर । नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ के बीच रायपुर के पांच दोस्त बाल-बाल बच गए। धादिंग जिले के मलेखु कस्बे में ये दोस्त चाय पीने के लिए करीब 10-15 मिनट रुके थे। इसी दौरान उन्हें पता चला कि आगे का पुल बाढ़ में बह चुका है।
Nepal Flood: अगर वे उस वक्त वहां नहीं रुकते और पहले निकल जाते तो शायद खुद भी बाढ़ की चपेट में आ जाते। दो दिन तक ऊंची जगह पर रहकर उन्होंने त्रिशूली नदी का उफान और उसमें बहती कारों व अन्य चीजों का भयावह मंजर अपनी आंखों से देखा। 28 अगस्त को सभी सुरक्षित रायपुर लौट आए। रह- रह कर वह भयावह मंजर उनकी आंखों में तैर जाता है।
चाय पीने रुके और आगे रास्ता बंद
माना कैंप क्षेत्र के रहने वाले नारायण सेन, दिनेश ओझा, प्रेम सिंह जगत, यतेंद्र प्रकाश और दिनेश सिंह ठाकुर 21 अगस्त को रायपुर से नेपाल के लिए निकले थे। अगले दिन नेपाल पहुंचने के बाद उन्होंने एक कार किराये पर ली और पशुपतिनाथ मंदिर, मनोकामना मंदिर समेत कई पर्यटन स्थलों की यात्रा की योजना बनाई थी। 26 अगस्त की सुबह करीब 9:30 से 10 बजे के बीच पांचों दोस्त धादिंग जिले के मलेखु कस्बे के एक होटल में चाय पीने के लिए रुक गए। इसी दौरान उन्हें जानकारी मिली कि आगे एक पुल बाढ़ में बह चुका है। 53 वर्षीय नारायण सेन के अनुसार चाय के लिए रुकना उनके लिए जिंदगी बचाने वाला फैसला साबित हुआ। उनके मुताबिक, अगर वे 10-15 मिनट पहले वहां से निकल गए होते तो शायद बाढ़ की चपेट में आ गए होते।
आंखों के सामने बहती रहीं कारें
पुल टूटने की जानकारी मिलने के बाद दोस्तों ने मलेखू में ही ऊंची जगह पर रुकने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने अपनी आंखों के सामने त्रिशूली नदी का रौद्र रूप देखा। नारायण सेन के मुताबिक, उन्होंने कारों को तेज बहाव में बहते देखा। पानी के साथ शव और दूसरी चीजें भी बह रही थीं। यह मंजर देखकर सभी डर गए। उन्हें लगातार इस बात की चिंता थी कि कहीं बाढ़ का पानी और न बढ़ जाए।रात अपनी कार में बिताई।
हालात ऐसे थे कि वे सो भी नहीं पाए।
होटल मालिक की मदद से परिवार से जुड़े रहे
बाढ़ के कारण रास्ता बंद होने के बाद दोस्तों को एक भारतीय व्यक्ति के होटल में रुकने का मौका मिला। सेन के मुताबिक, होटल मालिक ने उनकी काफी मदद की और उन्हें भोजन भी उपलब्ध कराया। दिनेश सिंह ठाकुर ने बताया कि उस इलाके में इंटरनेट सेवा काम कर रही थी। इसलिए वे लगातार अपने परिवार के संपर्क में रहे। इससे परिवार को उनकी स्थिति की जानकारी मिलती रही और दोस्तों को भी कुछ राहत मिली।










