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Home/Uncategorized/छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति से पूरी दुनिया ले सकती है प्रेरणा- बघेल
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छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति से पूरी दुनिया ले सकती है प्रेरणा- बघेल

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By fourthline.in
April 6, 2023 4 Min Read
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अजिरमा में 25 लाख रुपए से बनेगा सामुदायिक भवन
आकाशवाणी चौक का नामकरण
इंजीनियर कार्तिक उरांव के नाम

सरना स्थल कोरिया बाड़ी का
नाम आस्था आंगन

मुख्यमंत्री खद्दी परब में हुए शामिल
अम्बिकापुर । मुख्यमंत्री भूपेश बघेल गुरुवार को यहां राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय मैदान में मूली पढ़हा उरांव समाज के तत्वाधान में आयोजित खद्दी परब (सरहुल परब) में शामिल हुए। उन्होंने इस अवसर पर समाज प्रमुखों के साथ पारंपरिक रीति-रिवाज से खद्दी पूजा कर प्रदेश की जनता की खुशहाली व समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ग्राम पंचायत अजिरमा में सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 25 लाख रुपये देने, सरना स्थल कोरिया बाड़ी का नाम आस्था आंगन करने, आस्था आंगन में शेड निर्माण, ऑक्सीजन पार्क का नाम वृक्षमित्र ओपी अग्रवाल के नाम पर तथा आकाशवाणी चौक का नाम इंजीनियर कार्तिक उरांव के नाम पर करने की घोषणा की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ कीआदिवासी संस्कृति सबसे प्राचीन संस्कृति है और उसके अनेक गौरवशाली पंरपराएं तीज त्यौहार हैं , जिससे पूरी दुनिया प्रेरणा ले सकती है। आदिवासियों की जितने भी त्यौहार हैं वे सब प्रकृति से जुड़े हुए हैं। जीवन में कितने भी उतार चढ़ाव क्यों न आए हो जैसे ही त्यौहार आता है सभी खुशी से झुमने लगते हैं। उन्होंने कहा कि प्रकृति कि साथ जो जीता है, नाचता और गाता है उसी का नाम सरहुल है। प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए हमारी सरकार काम कर रही है। जल जंगल जमीन को बचाने के लिए एक तरफ फारेस्ट राइट एक्ट के तहत पट्टा देने का काम वन अधिकार पट्टा, सामुदायिक पट्टा एवं वन संसाधन पट्टा दिया जा रहा है। बिगड़े वनों को सुधारने का काम किया जा रहा है। शहरों में हरियाली बढ़ाने व प्राचीन वृक्षों को बचाने के लिए कृष्ण-कुंज का निर्माण किया जा रहा है। इसके साथ ही नरवा विकास के द्वारा वन क्षेत्रों में भूमिगत व सतही जल उपलब्ध हो सके। अभी हाल में ही मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना की भी शुरूआत की गई है ताकि निजी भूमि में भी कोई पेड़ लगाना चाहे तो उसे प्रात्साहित किया जा सके। इस योजना के तहत हमारा लक्ष्य 36 हजार एकड़ में पेड़ लगाने का है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष 107 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी हुई है 4 साल में कृषि का रकबा व किसानों की संख्या एवं उत्पादन में गुणात्मक सुधार हुआ है। हमने इस वर्ष फैसला किया है कि समर्थन मूल्य में धान की खरीदी 20 च्ंिटल प्रति एकड़ दी जाएगी। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना पूरे में छत्तीसगढ़ में ही लागू है और इसे बढाते हुए नगर पंचायत क्षेत्र में भी लागू कर दिया गया है। इसके साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, मितानिन, कोटवार, रसोइंया के मानदेय में वृद्धि की गई है। उन्होंने कहा कि शासकीय योजनाओं से लोग वंचित न रहे इसके लिए 1 अप्रैल से सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण किया जा रहा है। इस सर्वेक्षण के आधार पर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं ले पाने वाले हितग्राहियों को भी मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षित बेरोजगारों को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए 2500 रुपये बेरोजगारी भत्ता देने की शुरूआत भी हो गई है। पात्रता में आय की सीमा ढाई लाख कर दिया गया है। घर बैठे आवेदन की सुविधा भी दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग गोठान व गोबर का मजाक उड़ाते थे लेकिन वही गोठान व गोबर लोगों की आजीविका का अच्छा साधन बन गया है।
खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने कहा कि उरांव समाज का सरहुल पर्व जंगल पहाड़ में रहने वाले हमारे आदिवासी समाज पेड़ पौधा को अपना आराध्य मानते हैं उनकी पूजा करते हैं। उरांव जनजाति सरई पेड़ के नीचे पूजा करने की प्रथा पहाड़ जंगल में जनजाति जो प्रकृति की गोद में अपना जीवन-यापन करता है और उसी को अपना आराध्य मानता है हमारा जनजाति समुदाय पर्यावरण का संरक्षक है। आदिवासी समाज 9 अगस्त को पूरे दुनिया में इस दिन को विश्व आदिवासी दिवस के रूप में मनाते हैं। इस त्यौहार को मनाने के लिए मुख्यमंत्री ने छुट्टी घोषित कर समाज को गौरव प्रदान किया है। स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि चैत्र महीना पूर्णिमा तिथि तक रहता है। परंपरा के अनुसार सरहुल के नए वर्ष भी शुरू होता है। इस त्यौहार को मनाते हुए जगह-जगह भाई-बहन खूब नाचते- गाते हैं। लुण्ड्रा विधायक डॉ प्रीतम राम ने कहा कि सरहुल पर्व एक अविस्मरणीय व ऐतिहासिक पर्व है। सरहुल पर्व के अवसर पर पूरे समाज के लोग हर्षोल्लासित हैं क्योंकि पहली बार ऐसा अवसर आया है कि प्रदेश के मुखिया हमारे साथ हैं।
इस अवसर पर संदीय सचिव एवं भटगांव विधायक पारसनाथ राजवाड़े, छत्तीसगढ़ खाद्य आयोग के अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह बाबरा, बीस सूत्रीय कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति के उपाध्यक्ष श्री अजय अग्रवाल, छत्तीसगढ़ अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री भानुप्रताप सिंह , श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष शफी अहमद, गौ-सेवा आयोग के सदस्य अटल यादव, तेलघानी बोर्ड के सदस्य श्री लक्ष्मी गुप्ता, मदरसा बोर्ड के सदस्य इरफान सिद्दीकी, अपेक्स बैंक के संचालक अजय बंसल, छत्तीसगढ़ राज्य बीज प्रमाणीकरण बोर्ड के सदस्य अरविंद गुप्ता, कृषक कल्याण परिषद के सदस्य श्री संजय गुप्ता, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक के अध्यक्ष रामदेव राम जिला, उर्दू अकादमी के सदस्य बदरुद्दीन इराकी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मधु सिंह, महापौर डॉ अजय तिर्की, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री आदित्येश्वर शरण सिंहदेव, कमिश्नर डॉ संजय अलंग, ,आईजी राम गोपाल गर्ग, कलेक्टर कुन्दन कुमार, पुलिस अधीक्षक श्रीमती भावना गुप्ता, उरांव समाज के अध्यक्ष मंगल उरांव सहित अन्य अधिकारी तथा बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग उपस्थित थे।

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आदिवासी संस्कृतिछत्तीसगढ़तीज - त्योहारमुख्यमंत्री भूपेश बघेल
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