Captain Smit Machhar: नई दिल्ली। फ्लायदुबई विमान में 174 यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वीडियो कॉल पर बात की। इस दौरान मच्छार अपने अनुभव बताते हुए भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि विमान के अंदर हालात इतने खतरनाक हो गए थे कि उन्हें लगा कि विमान नीचे गिर जाएगा, लेकिन उन्होंने अपनी तरफ से यात्रियों को बचाने की पूरी कोशिश की।
बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित ने बताया कि मुश्किल हालात में वह हनुमान चालीसा पढ़ रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्हें लगा कि वह सभी यात्रियों को मरते हुए नहीं देख सकते। अपनी बहादुरी का श्रेय खुद लेने के बजाय उन्होंने कहा, मैंने नहीं, हनुमान जी ने सबको बचाया। प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी हिम्मत की तारीफ करते हुए जल्द स्वस्थ होने की कामना की। स्मित के भावुक होने पर पीएम मोदी ने उनसे कहा कि “आप मेरे सामने भावुक नहीं होंगे तो फिर कहां होंगे। इस बातचीत में पीएम ने उनके माता-पिता से भी बात की और उनकी परवरिश की सराहना की।
मुझे लगा विमान नीचे गिर जाएगा
प्रधानमंत्री से बातचीत में कैप्टन स्मित ने उस भयावह घटना को याद किया। उन्होंने बताया कि विमान में अचानक ऐसी स्थिति बनी कि उन्हें लगा कि विमान नीचे गिर सकता है।स्मित ने कहा कि उन्होंने जितना संभव था, उतना करने की कोशिश की। इसी दौरान वह हनुमान चालीसा पढ़ रहे थे। उनका कहना था कि उनके सामने यात्रियों की जिंदगी थी और वह उन्हें मरते हुए नहीं देख सकते थे। उन्होंने अपनी भूमिका को लेकर कहा कि उन्होंने जो किया, वह उनकी जिम्मेदारी थी, लेकिन यात्रियों को बचाने में उन्हें ईश्वर की कृपा का एहसास हुआ।
मैंने नहीं, हनुमान जी ने सबको बचाया
बातचीत का सबसे भावुक हिस्सा तब आया, जब कैप्टन स्मित ने अपनी बहादुरी का श्रेय खुद लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “मैंने नहीं हनुमान जी ने सबको बचाया।” उन्होंने बताया कि यात्रियों को बचाने की कोशिश के दौरान उन्हें गंभीर चोटें आईं और वह घायल होकर गिर गए थे।स्मित ने यह भी कहा कि विदेश में रहते हुए भी उन्हें ऐसा महसूस नहीं होता कि वह अपने देश से दूर हैं। उन्होंने कहा कि वह अपनी देश की संस्कृति से करीब हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी इस भावना और साहस की सराहना की। उन्होंने कहा कि पूरा देश उनके साथ है।
फ्लायदुबई विमान में आखिर हुआ क्या था?
30 सितंबर को फ्लायदुबई की FZ1073 उड़ान दुबई से तेल अवीव जा रही थी। विमान में 174 यात्री सवार थे। उड़ान के दौरान कॉकपिट में कैप्टन स्मित मच्छार और उनके सह-पायलट के बीच संघर्ष हुआ। रिपोर्टों के अनुसार सह-पायलट ने मच्छार पर हमला किया और विमान पर नियंत्रण लेने की कोशिश की। हमले के दौरान विमान तेजी से नीचे आया। रिपोर्टों के अनुसार विमान ने करीब 14 हजार फीट की ऊंचाई बहुत कम समय में गंवा दी थी। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन मच्छार ने कॉकपिट का दरवाजा खुलवाने में मदद की, जिसके बाद यात्रियों और क्रू के कुछ सदस्यों ने अंदर पहुंचकर हमलावर को काबू किया। इसके बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक में आपात स्थिति में उतारा गया। कैप्टन मच्छार को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। उनकी हालत स्थिर बताई गई है।
पीएम मोदी पहले भी कर चुके हैं तारीफ
इस घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 अक्टूबर को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की तारीफ की थी। पीएम ने उन्हें ‘हीरो’ बताते हुए कहा था कि बेहद खतरनाक परिस्थितियों और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने दूसरों की जान बचाने के लिए असाधारण साहस और दृढ़ संकल्प दिखाया।पीएम ने कहा था कि उनकी बहादुरी की वजह से सैकड़ों लोगों की जान बची और एक बड़ी त्रासदी टल गई।
पीएम मोदी ने कहा- ‘9/11 जैसी त्रासदी टली’
इससे पहले 1 अक्टूबर को UPSC के 100 साल पूरे होने के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने भी कैप्टन स्मित की बहादुरी का जिक्र किया था। पीएम मोदी ने कहा था कि कैप्टन स्मित ने धैर्य, सूझबूझ और साहस का परिचय दिया। उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बयान का हवाला देते हुए कहा कि एक भारतीय ने 9/11 जैसी त्रासदी को टाल दिया।11 सितंबर 2001 को अमेरिका में हुए आतंकी हमलों में अपहृत यात्री विमान को इमारतों से टकराया गया था।

