
CIMS Bilaspur : बिलासपुर। दांतों की सड़न और दर्द को मामूली समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज करना कई बार गंभीर स्वास्थ्य समस्या का कारण बन सकता है। इसका एक उदाहरण सिम्स बिलासपुर के दंत चिकित्सा विभाग में सामने आया, जहां 38 वर्षीय महिला के जबड़े में पुरानी सड़न और संक्रमण के कारण बनी बड़ी रेडिकुलर सिस्ट का सफल उपचार किया गया। मरीज का उपचार आयुष्मान योजना के तहत पूरी तरह निःशुल्क किया गया।
CIMS Bilaspur : 38 साल की महिला मरीज जबड़े में सूजन की शिकायत लेकर सिम्स के दंत चिकित्सा विभाग पहुंची थी। जांच के दौरान चिकित्सकों ने डिजिटल एक्स-रे एवं सीबीसीटी की सहायता से बीमारी की पहचान की। जांच में सामने आया कि प्रभावित दांत की जड़ के पास जबड़े की हड्डी का एक बड़ा हिस्सा सिस्ट के कारण प्रभावित हो चुका था।
सड़न और संक्रमण से बनी सिस्ट
दंत रोग विशेषज्ञ डॉक्टर भूपेंद्र कश्यप के अनुसार रेडिकुलर सिस्ट मुंह के भीतर विकसित होने वाली एक प्रकार की गांठ या थैली होती है, जिसमें तरल पदार्थ भरा होता है। यह सामान्यतः ऐसे दांत की जड़ के आसपास विकसित होती है, जो लंबे समय से सड़ा हुआ हो अथवा जिसमें पुराना संक्रमण हो। दांत की नस के निष्क्रिय या मृत होने के बाद संक्रमण धीरे-धीरे जड़ के आसपास की हड्डी तक पहुंच सकता है और समय के साथ सिस्ट का रूप ले सकता है।
शुरुआती अवस्था में रेडिकुलर सिस्ट के लक्षण स्पष्ट नहीं होते और कई बार मरीज को दर्द भी महसूस नहीं होता। धीरे-धीरे प्रभावित दांत के आसपास मसूड़े या जबड़े में हल्की सूजन, दांत का रंग काला या गहरा पीला पड़ना तथा चबाते समय दर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर स्थिति में चेहरे की बनावट में बदलाव अथवा दांत के हिलने जैसी समस्या भी हो सकती है।
दो चरणों में सफल उपचार
सिम्स में जांच के बाद चिकित्सकों की टीम ने मरीज के उपचार की योजना तैयार की। उपचार के पहले चरण में संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए प्रभावित दांत की रूट कैनाल थेरेपी (RCT) की गई। इसके बाद छोटे चीरे के माध्यम से सर्जिकल एन्यूक्लिएशन की प्रक्रिया अपनाकर सिस्ट को पूरी तरह बाहर निकाल दिया गया। इस प्रक्रिया में आसपास की हड्डी को अनावश्यक नुकसान पहुंचाए बिना सिस्ट को निकाला गया। उपचार के बाद मरीज की स्थिति में सुधार हुआ है और जबड़े की प्रभावित हड्डी भी अब धीरे-धीरे स्वस्थ होने की दिशा में है।
निजी अस्पतालों में भटकने के बाद सिम्स में मिला निःशुल्क उपचार
मरीज ने उपचार के लिए पहले निजी अस्पतालों में भी संपर्क किया था, लेकिन उपचार का खर्च अधिक होने के कारण वह वहां जांच और इलाज कराने में असमर्थ थी। बाद में उसे सिम्स में इस बीमारी के उपचार की जानकारी मिली। यहां आयुष्मान योजना के अंतर्गत उसका उपचार निःशुल्क किया गया। मरीज के लिए यह उपचार राहत और उम्मीद लेकर आया।
समय पर दंत जांच जरूरी
दंत चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप प्रकाश ने बताया कि दांत में सड़न, संक्रमण या चोट के कारण होने वाले दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर दंत चिकित्सक से परामर्श लेने और नियमित दंत जांच कराने से ऐसी बीमारियों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान की जा सकती है। उन्होंने नागरिकों से हर छह महीने में दंत जांच कराने की अपील की, ताकि छिपी हुई दंत समस्याओं का समय रहते उपचार किया जा सके और बड़ी सर्जरी की आवश्यकता को टाला जा सके।
टीम ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
इस सफल उपचार का श्रेय दंत चिकित्सा विभाग के डॉ. भूपेंद्र कश्यप के मार्गदर्शन में विभागाध्यक्ष एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ. संदीप प्रकाश तथा उनकी टीम को दिया गया है। टीम में डॉ. जण्डेल सिंह ठाकुर, डॉ. केतकी कोनीकर, डॉ. हेमलता राजमणी, डॉ. प्रकाश खरे एवं डॉ. सोनल पटेल शामिल रहे।सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति एवं अस्पताल अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने इस सफल उपचार की सराहना करते हुए मरीजों के हित में आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के उपयोग एवं बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए चिकित्सकीय टीम को प्रोत्साहित किया।










