• अजय गुप्ता, सूरजपुर। Municipal elections: शहर में राजनीतिक माहौल गरम है। हर गली-चौराहे पर बस एक ही चर्चा है कि नगर सरकार की कमान किसके हाथ में होगी? सूरजपुर की बगिया में कुसुम खिलेगा या दैवंती को आशीर्वाद मिलेगा, फैसले की घड़ी आ गई है। कल 15 फरवरी को ईवीएम खुलेगी और कुछ ही घंटों में सब कुछ साफ़ हो जायेगा। चाय-पान की दुकानों से लेकर होटलों तक में इसकी ही चर्चा है। कोई आंकड़ों का जोड़-घटाव लगा रहा है तो कोई कयासों के तीर चला रहा है।
Municipal elections: नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए भाजपा और कांग्रेस में सीधा मुकाबला होता आया है। दोनों प्रत्याशियों ने अपनी-अपनी जीत के दावे किए हैं और दोनों आत्मविश्वास से भरी हुई हैं। भाजपा की देवंती साहू को भरोसा है कि प्रदेश में पार्टी की सरकार होने का फायदा उन्हें मिलेगा। जनता ने विकास के नाम पर वोट दिया होगा।कांग्रेस की कुसुमलता राजवाड़े का दावा है कि नगर में कांग्रेस शासन के दौरान हुए विकास कार्यों पर जनता ने मोहर लगाई है। सवाल यह है जनता ने किसे चुना? क्या उन्होंने “डबल इंजन सरकार” का साथ दिया, या फिर पुराने अनुभवों पर भरोसा जताया? इसे लेकर शहर में चर्चाओं और सियासी गहमागहमी का दौर है।
Municipal elections: होटलों, दुकान, गलियों, हर जगह अध्यक्ष व वार्डों में कौन प्रत्याशी जीतेगा इसकी ही चर्चा हो रही है। यहां सिर्फ अध्यक्ष पद ही नहीं, पार्षद के प्रत्याशियों के बीच जबरदस्त टक्कर देखने को मिली। वार्ड क्रमांक 3, 6 और 16 सबसे ज्यादा सुर्खियों में हैं, जहां मुकाबला इतना तगड़ा रहा कि सांसें अटकी हुई हैं! प्रत्याशियों के समर्थकों में जोश है और ईवीएम के फैसले तक हर कोई बेसब्र है। कोई भाजपा की जीत तय मान रहा है, तो कोई कांग्रेस की वापसी का दावा कर रहा है।इन तमाम दावों के बीच आम जनता को भी 15 फरवरी का इंतजार है,जब अध्यक्ष सहित वार्ड के 58 प्रत्याशियों का भाग्य का फैसला ईवीएम से बाहर निकलेगा।
Municipal elections: हालांकि,यह इंतजार प्रत्याशियों के लिए भी बेहद बेचैनी भरा है। इधर आमजन चर्चाओं में कभी किसी को, तो कभी किसी को जिता रहे हैं। सस्पेंस चरम पर है! चर्चाओं का तापमान बढ़ता ही जा रहा है! सियासत की सुई किस ओर झुकेगी? कल ईवीएम खुलने के बस कुछ ही घंटों में सब साफ हो जाएगा।