
• अजय गुप्ता
Affection of the Voiceless : सूरजपुर। अपनत्व और विश्वास की डोर जब मजबूत हो, तो किसी आमंत्रण की दरकार नहीं रह जाती। नगर के मुख्य मार्ग स्थित एक प्रतिष्ठित कृषि बीज प्रतिष्ठान में इन दिनों ऐसा ही दिल छू लेने वाला दृश्य देखने को मिल रहा है। यहाँ एक गाय दिन में चार से पाँच बार पूरे अधिकार के साथ सीढ़ियाँ चढ़कर सीधे काउंटर के पास आकर बैठ जाती है।
Affection of the Voiceless : पहली नज़र में यह नज़ारा भले ही किसी को हैरान कर दे, लेकिन दुकान संचालक और ग्राहकों के लिए यह अब रोज़मर्रा के आत्मीय रिश्ते का हिस्सा बन चुका है। प्रतिष्ठान के संचालक के.के. मिश्रा बताते हैं कि गौ माता का यह सिलसिला काफी समय से चल रहा है। वह अपनी मर्ज़ी से आती है, कुछ देर काउंटर के पास आराम फरमाती है और बिना भोजन किए कभी वापस नहीं लौटती। दुकान पर उसके लिए नियमित रूप से भोजन और चारे का प्रबंध किया जाता है, जिसे ग्रहण करने के बाद ही वह बाहर निकलती है।
Affection of the Voiceless : गौ प्रेमी व वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र दुबे के साथ भी इस गौ माता का गहरा लगाव देखने को मिलता है। दुकान में कदम रखते ही वह सहज भाव से उनके इर्द-गिर्द पहुँच जाती है और स्नेह पाती है। श्री दुबे भी उसे परिवार के सदस्य की भाँति लाड़-दुलार करते हैं।
Affection of the Voiceless : सड़क से खुद चलकर सीढ़ियाँ चढ़ना और काउंटर के पास शांति से बैठ जाना, इस बेजुबान के अद्भुत स्वभाव को दर्शाता है। कृषि बीज का यह प्रतिष्ठान अब केवल किसानों की व्यावसायिक ज़रूरतों का केंद्र नहीं, बल्कि इंसान और मूक पशु के बीच अटूट विश्वास, संवेदना और प्रेम का जीवंत प्रतीक बन चुका है।










