Child Sold at Medical College : कोरबा। अस्पताल में जन्मा एक मासूम, मां की मौत और फिर 3 लाख के कथित इकरारनामे पर उसे दूसरे परिवार को सौंपने की तैयारी। कोरबा जिला मेडिकल कॉलेज का यह मामला अब नवजात की तस्करी से जोड़कर देखा जा रहा है। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और महिला बाल विकास विभाग की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है।
Child Sold at Medical College : कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश पर अब पूरे रैकेट की जांच शुरू हो गई है। मां की मौत के बाद रचा गया ‘सौदे’ का खकुछ दिन पहले करतला क्षेत्र की एक महिला ने कोरबा के मेडिकल कॉलेज में बच्चे को जन्म दिया, लेकिन प्रसव के बाद उसकी मौत हो गई। पत्नी की मौत से टूटे परिवार के सामने नवजात की परवरिश का संकट खड़ा हो गया। इसी बीच एक दूसरे दंपती ने बच्चे को लेने की इच्छा जताई।
Child Sold at Medical College : मामला तब बिगड़ा जब 3 लाख रुपये के लेनदेन वाला कथित इकरारनामा सामने आया। दस्तावेज में पैसे और कुछ शर्तों का जिक्र था। बात फैलते ही इसे ‘नवजात की बिक्री’ का नाम दे दिया गया। हंगामा बढ़ा तो कथित अनुबंध पत्र फाड़ दिए गए और परिजन आनन-फानन में बच्चे को अपने साथ ले गए। इस मामले में FIR दर्ज होने के बाद पुलिस और प्रशासन अब यह पता लगा रहे हैं कि 3 लाख के कथित सौदे के पीछे कौन था। क्या यह अवैध दत्तक ग्रहण की कोशिश थी या सुनियोजित तस्करी का हिस्सा? इकरारनामा किसने बनवाया, पैसे किसे मिलने थे, दलाल कौन था, इन सभी बिंदुओं पर जांच चल रही है।
Child Sold at Medical College : जिला कार्यक्रम अधिकारी बसंत मिंज के मार्गदर्शन में चाइल्ड हेल्पलाइन की जिला समन्वयक सरिता सिन्हा ने केस दर्ज कराया है। अधिकारियों ने साफ किया है कि जांच में गड़बड़ी मिली तो किसी को बख्शा नहीं जाएगा। महिला एवं बाल विकास विभाग ने दो टूक कहा है कि बिना कानूनी प्रक्रिया के बच्चे को गोद देना या लेना सीधा अपराध है। विभाग के मुताबिक सिर्फ बाल कल्याण समिति से “लीगल फ्री फॉर एडॉप्शन” घोषित बच्चे ही गोद दिए जा सकते हैं।










