Foreign education : नई दिल्ली। अब देश के छात्र अपने देश में रहकर विदेशी पढ़ाई कर सकते हैं। केंद्र  सरकार ने 15 विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस खोलने की मंजूरी दे दी है। इनमें से ज्यादातर संस्थानों में इसी साल अगस्त महीने से पढ़ाई और पहला बैच शुरू होने जा रहा है। शुरुआत में हर कैंपस में 200 से 250 छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि अगले पांच सालों में हर कैंपस में हर साल 1,000 से 1,200 छात्रों को एडमिशन मिले।

Foreign education :  मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में इन संस्थानों के कैंपस खुल रहे हैं। इस साल पढ़ाई शुरू करने के लिए अब तक 10 हजार से ज्यादा छात्र आवेदन कर चुके हैं। इन भारतीय कैंपस में पढ़ाई, परीक्षा और डिग्री का पूरा स्तर ठीक वैसा ही होगा जैसा विदेशों में मौजूद उनके मुख्य कैंपस में होता है। शुरुआत में कंप्यूटर साइंस, विज्ञान, तकनीक और गणित जैसे विषयों पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा छात्रों को एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत 1 से 2 सेमेस्टर विदेश जाकर पढ़ने का मौका भी मिलेगा। इससे छात्रों को दुनिया भर के लोगों से जुड़ने और आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिलेंगे।

Foreign education :  इन संस्थानों में एडमिशन लेने के लिए छात्रों के 12वीं क्लास में कम से कम 75 प्रतिशत अंक होने जरूरी हैं। वहीं ग्रेजुएशन में 55 से 70 प्रतिशत अंक होना आवश्यक है। जिन छात्रों के बोर्ड परीक्षा में अंग्रेजी विषय में 70 से 85 प्रतिशत अंक होंगे, उन्हें अलग से अंग्रेजी की भाषा परीक्षा देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कैंपस में पढ़ाने वाले शिक्षकों में भारतीय और विदेशी दोनों प्रोफेसर शामिल होंगे। कुछ यूनिवर्सिटी अपनी एक-तिहाई फैकल्टी सीधे विदेश से बुला रही हैं, तो कुछ संस्थान ऐसे भारतीय शिक्षकों को जोड़ रहे हैं जिन्होंने विदेशों से पढ़ाई की है। इससे छात्रों को भारत में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर का माहौल और शिक्षा मिल सकेगी।

विदेश में रहने का खर्च बचेगा

विदेश जाकर पढ़ाई करने में जहां 80 लाख से 1.2 करोड़ रुपए तक का भारी खर्च आता है, वहीं भारत में यह पढ़ाई 30 से 40 प्रतिशत कम खर्च में हो जाएगी। इसके साथ ही योग्य और जरूरतमंद छात्रों के लिए करीब 1,000 करोड़ रुपए के स्कॉलरशिप फंड का इंतजाम किया गया है। छात्रों को उनकी योग्यता के आधार पर 10 प्रतिशत से लेकर पूरी 100 प्रतिशत तक की स्कॉलरशिप मिल सकती है। कुछ यूनिवर्सिटी सालाना 2 लाख से लेकर 10 लाख रुपए तक की स्कॉलरशिप देने की तैयारी में हैं।

विदेशी मुद्रा देश से बाहर नहीं जाएगी

एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2040 तक भारत में मौजूद इन विदेशी कैंपस में 5.6 लाख से ज्यादा छात्र पढ़ाई कर रहे होंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा देश की अर्थव्यवस्था को होगा। भारतीय छात्रों के देश में ही पढ़ने से करीब 10.67 लाख करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा देश से बाहर जाने से बच जाएगी। विदेशी यूनिवर्सिटी के प्रमुखों का मानना है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा शिक्षा बाजार है और वे यहां के छात्रों को अपने मुख्य कैंपस जैसी ही बेहतरीन सुविधाएं और करियर के अवसर देना चाहते हैं।

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