72nd National Film Awards: नई दिल्ली/ रायपुर। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा के बाद छत्तीसगढ़ में उत्सव का माहौल है। इस बार प्रतिष्ठित पुरस्कारों में छत्तीसगढ़ की विशिष्ट संस्कृति पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म “राम-नामी” को “सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री फिल्म” का खिताब मिला है। इस बड़ी उपलब्धि पर राज्यभर में खुशी की लहर दौड़ गई है, और इसे प्रदेश की लोक परंपराओं तथा आध्यात्मिक धरोहर के लिए एक ऐतिहासिक पल माना जा रहा है।

72nd National Film Awards:  इस पूरे मामले के तहत, 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में चुनी गई डॉक्यूमेंट्री “राम-नामी” छत्तीसगढ़ के उस अनूठे समाज की जीवनशैली को दर्शाती है जो अपने पूरे शरीर पर भगवान श्रीराम का नाम गोदवाते हैं। रामनामी समाज अपनी सादगीपूर्ण जीवनशैली, अटूट आस्था और लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए देश भर में अलग पहचान रखता है। निर्देशक श्री भरतबाला गणपति के निर्देशन में बनी इस डॉक्यूमेंट्री ने रामनामी समाज की भक्ति, समरसता और आध्यात्मिक मूल्यों को बेहद संवेदनशील और प्रभावशाली तरीके से पर्दे पर उतारा है। इस फिल्म के जरिए छत्तीसगढ़ की इस प्राचीन लोक परंपरा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर एक नई पहचान मिली है।

72nd National Film Awards:  छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और जनजातीय विरासत हमेशा से देश और दुनिया के लिए कौतूहल और अध्ययन का विषय रही है। रामनामी परंपरा का इतिहास सदियों पुराना है, जहां समाज के लोग बिना किसी भेदभाव के भगवान राम के नाम को अपनी पहचान बनाते आए हैं। बीते कुछ वर्षों में राज्य की लोक कलाओं और पारंपरिक जीवनशैली को वैश्विक स्तर पर लाने के लिए कई रचनात्मक प्रयास किए गए हैं। इसी कड़ी में बनी यह डॉक्यूमेंट्री इस बात का प्रमाण है कि क्षेत्रीय संस्कृति और कलाएं मुख्यधारा के सिनेमा और कला जगत में कितना गहरा प्रभाव छोड़ सकती हैं। 

72nd National Film Awards:   इस गौरवशाली क्षण पर छत्तीसगढ़ के संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने डॉक्यूमेंट्री के निर्देशक भरतबाला गणपति और पूरी निर्माण टीम को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान केवल एक फिल्म की सफलता नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, सांस्कृतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है। मंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि इस प्रकार के रचनात्मक प्रयास आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। 

जनजीवन, पर्यटन पर प्रभाव

इस राष्ट्रीय सम्मान का सीधा और सकारात्मक असर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन पर पड़ेगा। देश-विदेश के पर्यटकों और शोधकर्ताओं की रुचि अब छत्तीसगढ़ की जनजातीय और पारंपरिक विरासत के प्रति और अधिक बढ़ेगी। स्थानीय स्तर पर कला और संस्कृति से जुड़े लोगों को इससे नया प्रोत्साहन मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की उपलब्धियों से राज्य में सांस्कृतिक पर्यटन को पंख लगेंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा।


 72nd National Film Awards: छत्तीसगढ़ की राम-नामी डॉक्यूमेंट्री को सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार संक्षेप में कहें तो, 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में “राम-नामी” डॉक्यूमेंट्री की यह जीत छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुई है। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय और जमीनी संस्कृति में वैश्विक मंच पर चमकने की पूरी क्षमता है। आने वाले समय में इस फिल्म की स्क्रीनिंग और इससे जुड़े आयोजनों को लेकर  सरकार और सांस्कृतिक संगठनों द्वारा कुछ नए कार्यक्रमों की घोषणा की जा सकती है, जिसकी अपडेट समय पर मिलती रहेगी।

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