Jal Jeevan Mission :  रायपुर/बलरामपुर/बैकुंठपुर।  छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में ही नहीं सरगुजा और बलरामपुर जिले के कई गांवों में नल-जल योजनाओं पर करोड़ों रूपए खर्च होने के बावजूद लोगों को पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। लोग आज भी वैकल्पिक पारंपरिक जलस्त्रोतों पर निर्भर हैं। हालत यह है कि अब इन फेल योजनाओं पर शासन – प्रशासन के अधिकारी बात भी करना नहीं चाहते। जिन योजनाओं करोड़ों रुपए खर्च किए गए उन योजनाओं को उपयोगी बनाने पर भी नहीं सोचा था रहा है।

Jal Jeevan Mission :    हाल यह है कि कहीं ठेकेदारों की लापरवाही के कारण पाइपलाइन बिछाने का काम अधूरा छोड़ दिया गया । कई घरों के सामने नल के टोंटी (टैप) तो लगा दिए गए हैं, लेकिन उन्हें मुख्य पानी की टंकी (सोर्स) से जोड़ा नहीं गया है। इसके अलावा, कई जगहों पर भूजल स्तर  कम होने या सही जल स्रोत न मिलने के कारण टंकियां खाली पड़ी हैं। राजपुर विकासखण्ड के ग्राम परसागुड़ी का हाल और भी बुरा है। यहां वर्षों पूर्व नल-जल योजना को पूरा बताकर पानी सप्लाई के लिए काम कागजी तौर पर ग्राम पंचायत को सौंपा जा चुका है। लेकिन कभी यहां की पानी टंकी नहीं भरी। सूखी पड़ीं पानी की टंकी अभी भी इसकी कहानी कह रही हैं।

Jal Jeevan Mission :  नल-जल योजनाओं का हाल जानकर  कोई भी कह सकता है कि जल जीवन मिशन के तहत गांवों में लोगों के घरों में पीने का पानी पहुंचाने की सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना में बड़ी गड़बड़ी हुई है। छत्तीसगढ़ में इस मिशन के तहत केन्द्र से मिले करीब 11 हजार करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। अभी करीब 15 हजार करोड़ रूपए की नल-जल योजनाओं  पर काम होना है। केंद्र सरकार को छत्तीसगढ़ में इस मिशन के तहत हुए कार्यों की जांच करानी चाहिए। यदि घरों में पानी ही नहीं पहुंचे तो करोड़ों रूपए बेकार ही बह जाने से रोकने का काम भी सरकार को करना चाहिए।

Jal Jeevan Mission :   जल जीवन मिशन की की नल-जल योजनाएं इसलिए भी फेल हो गई क्योंकि जिन नलकूपों से पानी टंकी को भरा जाना था उन नलकूपों में उतना पानी ही नहीं था। ठेकेदारों ने पैसा  निकालने के लिए सबकुछ ठीक बता दिया और विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों ने बिना जांच- पड़ताल किए भुगतान भी कर दिया। नल-जल की फेल योजनाएं इसकी कहानी कह रही हैं और राज्य के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सच्चाई को स्वीकारने के लिए तैयार नहीं।

Jal Jeevan Mission :   कोरिया जिले में भी ऐसी ही स्थिति पर विधानसभा में बैकुंठपुर के विधायक एवं पूर्व मंत्री भैयालाल राजवाड़े ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कोरिया जिले के कई गांवों में जल जीवन मिशन के तहत करोड़ों रूपए खर्च कर बनाई गई पानी टंकियों के सूखी होने और नल-जल योजना का ग्रामीणों को कोई लाभ नहीं मिलने की स्थिति पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री अरूण साल से जवाब चाहा। श्री राजवाड़े के प्रश्न पर मंत्री श्री साव ने पहले तो सब ठीक होने की बात कही। वे  इस प्रश्न की सच्चाई स्वीकारने को ही तैयार नहीं थे, लेकिन जब श्री राजवाड़े  ने ग्राम पंचायतों की रिपोर्ट का हवाला दिया तो श्री साव ने वे गांव विशेष की समस्या की लिखित शिकायत पर जांच कराने की बात कही।  सिर्फ कोरिया जिले की ही नहीं सभी नल-जल योजनाओं की उपयोगिता की जांच कराने की आवश्यकता है ।

Jal Jeevan Mission :   छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन के तहत अब तक जिन योजनाओं पर काम हुआ है , अधिकारियों से नए सिरे से उपयोगिता प्रमाण पत्र मांगने की आवश्यकता है ताकि वास्तविक स्थिति का पता चल सके। जो योजनाएं फेल पाई जाती है उन योजनाओं को उपयोगी बनाने के विकल्पों पर गौर  किया जा सकता है। अलग और  अतिरिक्त नलकूपों का खनन  कर पानी टंकियों को भरने की व्यवस्था की जा सकती है। गांव में उपलब्ध प्राकृतिक जलस्त्रोतों से लिफ्ट करके भी पानी टंकियों को भरने की व्यवस्था की जा सकती है। ऐसा करके 11 हजार रूपए मिट्टी में मिल जाने से रोका जा सकता है।

Jal Jeevan Mission :  सरकार को जल जीवन मिशन के तहत कोई  नया काम हाथ में लेने से पहले पहले की नल-जल योजनाओं की उपयोगिता अवश्य देखनी चाहिए। विशेष टीम भेजकर इसकी जांच कराई  जा सकती है। चूंकि योजना का क्रियान्वयन राज्य सरकार के अधीन है इसलिए उसका सब ठीक बताना लाजिमी ही है। अगर सरकारी धन खर्च करके कोई योजना चलाई जा रही है तो उसका पूरा लाभ नागरिकों को मिलना चाहिए। अगर योजना के क्रियान्वयन के स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो दोषियों को उसका दंड भी मिलना चाहिए।

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