Disproportionate assets case: अम्बिकापुर। जिला कलेक्टोरेट में सहायक ग्रेड-3 के पद पर रहे क्लर्क ऋषि कुमार सिंह को आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में विशेष सत्र न्यायालय ने चार वर्ष के कठोर कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। कोर्ट ने जब्त करीब एक किलो सोने के जेवर और 14 लाख 95 हजार रुपये की नकद राशि को राजसात करने का भी आदेश दिया है।
Disproportionate assets case: विशेष सत्र न्यायाधीश ममता पटेल ने ऋषि सिंह के पास उनकी ज्ञात और वैध आय की तुलना में 4 करोड़ 10 लाख 35 हजार 657 रुपये अधिक की चल-अचल संपत्ति पाए जाने के मामले में आज फैसला सुनाया। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) रायपुर ने 18 जून 2013 को ऋषि सिंह के केदारपुर स्थित मकान पर छापा मारा था। कार्रवाई के दौरान 14 लाख 12 हजार रुपये नकद, बड़ी मात्रा में सोने-चांदी के जेवर और कई अचल संपत्तियों से संबंधित जानकारी सामने आई थी।
Disproportionate assets case: जांच के बाद ACB ने वर्ष 2018 में विशेष न्यायालय में अभियोग पत्र पेश किया था। जांच में ऋषि सिंह, उनकी पत्नी और बच्चों के नाम पर कई संपत्तियां मिली थीं। इनमें केदारपुर, अंबिकापुर में दो मंजिला मकान, डिगमा में पुत्र के नाम फार्म हाउस, सुभाषनगर-भगवानपुर में पुत्री के नाम फार्म हाउस, अंबिकापुर में निर्माणाधीन मैरिज हॉल और कुंडला सिटी में पुत्र व पुत्री के नाम अर्धनिर्मित मकान शामिल थे। दत्ता कॉलोनी, नमनाकला में पत्नी के नाम मकान भी मिला था।
लॉकर में मिले सोने-चांदी के जेवर राजसात
जांच के दौरान ऋषि सिंह और उनकी पत्नी सुनयना सिंह के नाम SBI लॉकर से 82,500 रुपये नकद मिले थे। इसके अलावा करीब 950.09 ग्राम सोने और 856 ग्राम चांदी के जेवर जब्त किए गए थे। इनकी कुल कीमत 25 लाख 47 हजार 598 रुपये आंकी गई थी। अभियोजन के मुताबिक, ऋषि कुमार सिंह की जुलाई 1984 में राजस्व विभाग में सहायक ग्रेड-3 के पद पर अनुकंपा नियुक्ति हुई थी। 5 जुलाई 1984 से 19 जून 2013 तक की अवधि में उनके, उनकी पत्नी और बच्चों के नाम कुल 4 करोड़ 49 लाख 46 हजार 736 रुपये की चल-अचल संपत्ति पाई गई। इसके मुकाबले उनकी ज्ञात एवं वैध आय 39 लाख 11 हजार 79 रुपये थी।
Disproportionate assets case: आय से अधिक संपत्ति के मामले में क्लर्क को 4 साल का कठोर कारावास , एक किलो सोने के जेवर और 14ं.95 रूपए राजसात मामले की सुनवाई के दौरान आय से अधिक संपत्ति के संबंध में संतोषजनक स्रोत न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर सके। कुछ संपत्तियों को उन्होंने पैतृक संपत्ति बताया, लेकिन न्यायालय ने उनके बचाव को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(इ) सहपठित धारा 13(2) के तहत ऋषि कुमार सिंह को चार वर्ष के कठोर कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। सजा सुनने के बाद उनकी ओर लगाई गई जमानत की अर्जी न्यायालय ने खारिज कर दी और ऋषि सिंह को जेल भेज दिया गया।
रिटायरमेंट के बाद आया फैसला
ऋषि सिंह करीब एक वर्ष पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनके खिलाफ चल रहे आय से अधिक संपत्ति के मामले में फैसला सेवानिवृत्ति के लगभग एक साल बाद आया है। अंबिकापुर में ऋषि सिंह का नाम पहले भी विवादों में रहा है। वर्ष 2011 में तत्कालीन कलेक्टर गेंद सिंह धनंजय के कार्यकाल में बंगाली जमीनों की बिक्री की अनुमति से जुड़े मामलों को लेकर वे चर्चा में रहे थे। बाद में कलेक्टर आर. प्रसन्ना के कार्यकाल में उन्हें एक मामले में निलंबित भी किया गया था।










