41st Chakradhar Festiwal : रायगढ़। यहां की कला-प्रेमी धरती पर संगीत, नृत्य और संस्कृति के महाकुंभ 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह -2026 का भव्य शुभारंभ सोमवार को रामलीला मैदान में हुआ। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने महाराजा चक्रधर सिंह के तैलचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर इस प्रतिष्ठित आयोजन का औपचारिक उद्घाटन किया।
कला को मिला राज-सिंहासन से ऊंचा स्थान
राज्यपाल रमेन डेका ने अपने संबोधन में कहा कि महाराजा चक्रधर सिंह ने अपनी कला-साधना से यह सिद्ध किया कि कला किसी क्षेत्र विशेष की मोहताज नहीं होती। उन्होंने राजसिंहासन से अधिक महत्व कला को दिया और कलाकारों को संरक्षण प्रदान किया। ‘नर्तन सर्वस्व’, ‘तालतोय निधि’ और ‘राग रत्न मंजूषा’ जैसी उनकी अमूल्य कृतियां आज भी साहित्य और कला जगत की बड़ी धरोहर हैं। रायगढ़ घराने के कथक और यहां के संगीत ने देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है।
गणेश वंदना और मनमोहक प्रस्तुतियां
समारोह के पहले दिन की शुरुआत भव्य गणेश वंदना के साथ हुई। कला गुरु स्वर्गीय वेदमणि सिंह ठाकुर के शिष्यों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद प्रियंका साहू के निर्देशन में विभिन्न कलाकारों ने गायन और वादन की प्रस्तुतियां दीं, जिसमें पखावज, तबला, बांसुरी, वायलिन और घुंघरू वादन ने समां बांध दिया।
सांस्कृतिक विरासत और विकास का संतुलन
राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह और लोकसभा सांसद राधेश्याम राठिया ने भी इस दौरान अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि औद्योगिक विकास के साथ-साथ अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। यह समारोह रायगढ़ के रामलीला मैदान में 14 सितंबर से 23 सितंबर 2026 तक चलेगा।









